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जय श्री माता दी 🙏❤️ ‼️🔱༺꧁ #जय_मां_ #महागौरी ꧂༻🔱‼️ दरबार के सभी 🔱🎪 प्रभु भक्तों को दुर्गा अष्टमी की 🔱🎪 हार्दिक शुभकामनाएं🎪🔱 ⚜▬▬▬▬▬▬॥🕉॥▬▬▬▬▬▬⚜ ‼️या देवी सर्वभू‍तेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता‼️ ‼️नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः‼️ ⚜▬▬▬▬▬▬॥🐯॥▬▬▬▬▬▬⚜ ༺꧁ #ॐ_देवी_ #महागौरी_नमः꧂༻ 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 #काश_हर_सुबह___ #नवरात्र_सी___होती...!! #हर___किसी___की___नज़र___मे___बेटियां #देवी_______सी_______होती...!!! 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 महागौरी पूजा दुर्गा अष्टमी एवम् कन्या पूजन कि ढेरों शुभकामनाएं माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। 🙏🌺🔱🚩 🌹🙏 #जय_माता_दी 🙏🏻🌹 #राम_नवमी_30_मार्च_2023_को_है:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं. जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग, उपाय, राम नवमी पर बन रहे हैं 5 अति दुर्लभ योग, जानें डेट, पूजा का मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. ये चैत्र नवरात्रि का नौवां और आखिरी दिन होता है. इस दिन राम मंदिर श्रीराम का भव्य श्रृंगार होता है. रामलला के जन्म के वक्त विधि विधान से पूजा की जाती है और ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं. इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है. आइए जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग. #राम_नवमी_शुभ_मुहूर्त:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 29 मार्च 2023 को रात 09 बजकर 07 मिनट पर आरंभ हो रही है. नवमी तिथि की समाप्ति 30 मार्च 2023 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगी. #राम_लला_की_पूजा_का_मुहूर्त:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 सुबह 11:17 - दोपहर 01:46 (अवधि 02 घण्टे 28 मिनट्स) अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12.01 - दोपहर 12.51 #राम_नवमी_शुभ_योग:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 राम नवमी पर इस बार 5 शुभ योग गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरुवार का संयोग बन रहा है. राम नवमी के दिन इन पांचों योग के होने से श्रीराम की पूजा का शीघ्र फल मिलेगा साथ ही इस दिन किए तमाम कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त होगी. #गुरु पुष्य योग:- 30 मार्च 10.59 - 31 मार्च सुबह 06.13 #अमृत_सिद्धि_योग:- 30 मार्च, 10.59 - 31 मार्च,सुबह 06.13 #सर्वार्थ_सिद्धि_योग_पूरे_दिन #रवि_योग_पूरे_दिन गुरुवार श्रीराम भगवान विष्णु के 7वें अवतार हैं और गुरुवार का दिन विष्णु जी को अति प्रिय है. ऐसे में राम जन्मोत्सव गुरुवार के दिन होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। #राम_नवमी_के_दिन_क्या_करें:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में नभगवान श्रीराम का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें. फिर घर में रामायण का पाठ करें. कहते हैं जहां रामायण पाठ होता है वहां श्रीराम और हनुमान जी वास रहता है. इससे घर में खुशहाली आती है. धन वैभव की वृद्धि होती है. रामनवमी के दिन एक कटोरी में गंगा जल राम रक्षा मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचन्द्राय श्रीं नम:' का जाप 108 बार करें. अब घर के हर कोने-छत पर इसका छिड़काव करें. मान्यता है इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है, टोने-टोटके का असर नहीं रहता है. ____________(((((#Vnita)))))_______🔻🔺🔻🔺🔻 @everyone 🙏🙏❤️

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बेरोजगारी पर निबंध By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबबाल वनिता महिला आश्रम




बेरोजगारी किसी भी देश के विकास में प्रमुख बाधाओं में से एक है। भारत में बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है। शिक्षा का अभाव, रोजगार के अवसरों की कमी और प्रदर्शन संबंधी समस्याएं कुछ ऐसे कारक हैं जो बेरोज़गारी का कारण बनती हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए भारत सरकार को प्रभावी कदम उठाने की ज़रूरत है। विकासशील देशों के सामने आने वाली मुख्य समस्याओं में से एक बेरोजगारी है। यह केवल देश के आर्थिक विकास में खड़ी प्रमुख बाधाओं में से ही एक नहीं बल्कि व्यक्तिगत और पूरे समाज पर भी एक साथ कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डालती है।

बेरोजगारी पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essay on Unemployment in Hindi)निबंध 1 (300 शब्द)बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है। इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। कई कारक हैं जो बेरोजगारी का कारण बनते हैं। यहां इन कारकों की विस्तार से व्याख्या की गई और इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए संभावित समाधान बताये गये हैं।भारत में बेरोजगारी को बढ़ाने वाले कारक
जनसंख्या में वृद्धि

देश की जनसंख्या में तेजी से होती वृद्धि बेरोजगारी के प्रमुख कारणों में से एक है।
मंदा आर्थिक विकास
देश के धीमे आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप लोगों को रोजगार के कम अवसर प्राप्त होते हैं जिससे बेरोजगारी बढ़ती है।
मौसमी व्यवसाय
देश की आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में जुड़ा हुआ है। मौसमी व्यवसाय होने के कारण यह केवल वर्ष के एक निश्चित समय के लिए काम का अवसर प्रदान करता है।
औद्योगिक क्षेत्र की धीमी वृद्धि
देश में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि बहुत धीमी है। इस प्रकार इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं।
कुटीर उद्योग में गिरावट
कुटीर उद्योग में उत्पादन काफी गिर गया है और इस वजह से कई कारीगर बेरोजगार हो गये हैं।
बेरोजगारी खत्म करने के संभव समाधान
जनसंख्या पर नियंत्रण
यह सही समय है जब भारत सरकार देश की आबादी को नियंत्रित करने के लिए कठोर कदम उठाए।
शिक्षा व्यवस्था
भारत में शिक्षा प्रणाली कौशल विकास की बजाय सैद्धांतिक पहलुओं पर केंद्रित है। कुशल श्रमशक्ति उत्पन्न करने के लिए प्रणाली को सुधारना होगा।
औद्योगिकीकरण
लोगों के लिए रोज़गार के अधिक अवसर बनाने के लिए सरकार को औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए।
विदेशी कंपनियां
सरकार को रोजगार की अधिक संभावनाएं पैदा करने के लिए विदेशी कंपनियों को अपनी इकाइयों को देश में खोलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
रोजगार के अवसर
एक निश्चित समय में काम करके बाकि समय बेरोजगार रहने वाले लोगों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए।
निष्कर्ष
देश में बेरोजगारी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हालाँकि सरकार ने रोजगार सृजन के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं पर अभी तक वांछनीय प्रगति हासिल नहीं हो पाई है। नीति निर्माताओं और नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोजगार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए।

 
निबंध 2 (400 शब्द)भारत में बेरोजगारी प्रच्छन्न बेरोजगारी, खुले बेरोजगारी, शिक्षित बेरोजगारी, चक्रीय बेरोजगारी, मौसमी बेरोजगारी, तकनीकी बेरोजगारी, संरचनात्मक बेरोजगारी, दीर्घकालिक बेरोजगारी, घर्षण बेरोज़गारी और आकस्मिक बेरोजगारी सहित कई श्रेणियों में विभाजित की जा सकती है। इन सभी प्रकार की बेरोजगारियों के बारे में विस्तार से पढ़ने से पहले हमें यह समझना होगा कि वास्तव में किसे बेरोजगार कहा जाता है? मूल रूप से बेरोजगार ऐसा व्यक्ति होता है जो काम करने के लिए तैयार है और एक रोजगार के अवसर की तलाश कर रहा है पर रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ है। जो लोग स्वेच्छा से बेरोजगार रहते हैं या कुछ शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण काम करने में असमर्थ होते हैं वे बेरोजगार नहीं गिने जाते हैं।
यहां बेरोजगारी के विभिन्न प्रकारों पर एक विस्तृत नज़र डाली गई है:
प्रच्छन्न बेरोजगारी
जब ज़रूरी संख्या से ज्यादा लोगों को एक जगह पर नौकरी दी जाती है तो इसे प्रच्छन्न बेरोजगारी कहा जाता है। इन लोगों को हटाने से उत्पादकता प्रभावित नहीं होती है।
मौसमी बेरोजगारी
जैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है यह उस तरह की बेरोजगारी का प्रकार है जिसमें वर्ष के कुछ समय में ही काम मिलता है। मुख्य रूप से मौसमी बेरोजगारी से प्रभावित उद्योगों में कृषि उद्योग, रिसॉर्ट्स और बर्फ कारखानें आदि शामिल हैं।
खुली बेरोजगारी
खुली बेरोजगारी से तात्पर्य है कि जब एक बड़ी संख्या में मजदूर नौकरी पाने में असमर्थ होते हैं जो उन्हें नियमित आय प्रदान कर सके। यह समस्या तब होती है क्योंकि श्रम बल अर्थव्यवस्था की विकास दर की तुलना में बहुत अधिक दर से बढ़ जाती है।
तकनीकी बेरोजगारी
तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल से मानवी श्रम की आवश्यकता कम होने से भी बेरोजगारी बढ़ी है।
संरचनात्मक बेरोजगारी
इस प्रकार की बेरोज़गारी देश की आर्थिक संरचना में एक बड़ा बदलाव की वजह से होती है। यह तकनीकी उन्नति और आर्थिक विकास का नतीजा है।
चक्रीय बेरोजगारी
व्यावसायिक गतिविधियों के समग्र स्तर में कमी से चक्रीय बेरोज़गारी होती है। हालांकि यह घटना थोड़े समय के ही लिए है।
शिक्षित बेरोजगारी
उपयुक्त नौकरी खोजने में असमर्थता, रोजगार योग्य कौशल की कमी और दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली जैसे कुछ कारण हैं जिससे शिक्षित बेरोजगार रहता है।
ठेका बेरोज़गारी
इस तरह के बेरोजगारी में लोग या तो अंशकालिक आधार पर नौकरी करते हैं या उस तरह के काम करते हैं जिसके लिए वे अधिक योग्य हैं।
प्रतिरोधात्मक बेरोजगारी
यह तब होता है जब श्रम बल की मांग और इसकी आपूर्ति उचित रूप से समन्वयित नहीं होती है।
दीर्घकालिक बेरोजगारी
दीर्घकालिक बेरोजगारी वह होती है जो जनसंख्या में तेजी से वृद्धि और आर्थिक विकास के निम्न स्तर के कारण देश में जारी है।
आकस्मिक बेरोजगारी
मांग में अचानक गिरावट, अल्पकालिक अनुबंध या कच्चे माल की कमी के कारण ऐसी बेरोजगारी होती है।
निष्कर्ष
हालांकि सरकार ने हर तरह की बेरोजगारी को नियंत्रित करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं परन्तु अभी तक परिणाम संतोषजनक नहीं मिले हैं। सरकार को रोजगार सृजन करने के लिए और अधिक प्रभावी रणनीति तैयार करने की जरूरत है।


 
निबंध 3 (500 शब्द)बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। शिक्षा की कमी, रोजगार के अवसरों की कमी, कौशल की कमी, प्रदर्शन संबंधी मुद्दे और बढ़ती आबादी सहित कई कारक भारत में इस समस्या को बढ़ाने में अपना योगदान देते हैं। व्यग्तिगत प्रभावों के साथ-साथ पूरे समाज पर इस समस्या के नकारात्मक नतीजे देखे जा सकते हैं। सरकार ने इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई तरह कदम उठाये हैं। इनमें से कुछ का उल्लेख विस्तार से इस प्रकार है।
बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकारी पहल
स्वयं रोजगार के लिए प्रशिक्षण
1979 में शुरू किए गये इस कार्यक्रम का नाम नेशनल स्कीम ऑफ़ ट्रेनिंग ऑफ़ रूरल यूथ फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट (TRYSEM) था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के बीच बेरोजगारी को कम करना है।
इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IRDP)
वर्ष 1 978-79  में ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्ण रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया। इस कार्यक्रम पर 312 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे और 182 लाख परिवारों को इससे लाभ हुआ था।
विदेशी देशों में रोजगार
सरकार विदेशी कंपनियों में रोजगार पाने में लोगों की मदद करती है। अन्य देशों में लोगों के लिए काम पर रखने के लिए विशेष एजेंसियां ​​स्थापित की गई हैं।
लघु और कुटीर उद्योग
बेरोजगारी के मुद्दे को कम करने के प्रयास में सरकार ने छोटे और कुटीर उद्योग भी विकसित किए हैं। कई लोग इस पहल के साथ अपनी जीविका अर्जित कर रहे हैं।
स्वर्ण जयंती रोजगार योजना
इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहरी आबादी के लिए स्वयंरोजगार और मजदूरी-रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इसमें दो योजनाएं शामिल हैं:
शहरी स्वयं रोजगार कार्यक्रम
शहरी मजदूरी रोजगार कार्यक्रम

रोजगार आश्वासन योजना
यह कार्यक्रम देश में 1752 पिछड़े वर्गों के लिए 1994 में शुरू किया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बेरोजगार लोगों को इस योजना के तहत 100 दिनों तक अकुशल मैनुअल काम प्रदान किया गया था।
सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)
यह कार्यक्रम 13 राज्यों में शुरू किया गया और मौसमी बेरोजगारी को दूर करने के उद्देश्य से 70 सूखा-प्रवण जिलों को कवर किया गया। अपनी सातवीं योजना में सरकार ने 474 करोड़ रुपये खर्च किए।
जवाहर रोजगार योजना
अप्रैल 1989 में शुरू किए गये इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक गरीब ग्रामीण परिवार में कम से कम एक सदस्य को एक वर्ष तक पचास से सौ दिन रोजगार प्रदान करना था। व्यक्ति के आसपास के क्षेत्र में रोजगार का अवसर प्रदान किया जाता है और इन अवसरों का 30% महिलाओं के लिए आरक्षित है।
नेहरू रोज़गार योजना (NRY)
इस कार्यक्रम के तहत कुल तीन योजनाएं हैं। पहली योजना के अंतर्गत शहरी गरीबों को सूक्ष्म उद्यमों को स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। दूसरी योजना के अंतर्गत 10 लाख से कम की आबादी वाले शहरों में मजदूरों के लिए मजदूरी-रोजगार की व्यवस्था की जाती है। तीसरी योजना के तहत शहरों में शहरी गरीबों को अपने कौशल से मेल खाते रोजगार के अवसर दिए जाते हैं।
रोजगार गारंटी योजना
बेरोजगार लोगों को इस योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसे केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान आदि सहित कई राज्यों में शुरू किया गया है।
इसके अलावा बेरोजगारी को कम करने के लिए कई अन्य कार्यक्रम सरकार द्वारा शुरू किए गए हैं।
निष्कर्ष
हालांकि सरकार देश में बेरोजगारी की समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय कर रही है पर इस समस्या को सही मायनों में रोकने के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।
 
निबंध 4 (600 शब्द)बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है। कई कारक हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं। इनमें से कुछ में उचित शिक्षा की कमी, अच्छे कौशल और हुनर की कमी, प्रदर्शन करने में असमर्थता, अच्छे रोजगार के अवसरों की कमी और तेजी से बढ़ती आबादी शामिल है। आगे देश में बेरोजगारी स्थिरता, बेरोजगारी के परिणाम और सरकार द्वारा इसे नियंत्रित करने के लिए किए गए उपायों पर एक नज़र डाली गई है।
भारत में बेरोजगारी से संबंधित आकंडे
भारत में श्रम और रोजगार मंत्रालय देश में बेरोजगारी के रिकॉर्ड रखता है। बेरोजगारी के आंकड़ों की गणना उन लोगों की संख्या के आधार पर की जाती है जिनके आंकड़ों के मिलान की तारीख से पहले 365 दिनों के दौरान पर्याप्त समय के लिए कोई काम नहीं था और अभी भी रोजगार की मांग कर रहे हैं।
वर्ष 1983 से 2013 तक भारत में बेरोजगारी की दर औसत 7.32 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक 9.40% थी और 2013 में यह रिकॉर्ड 4.90% थी। वर्ष 2015-16 में बेरोजगारी की दर महिलाओं के लिए 8.7% हुई और पुरुषों के लिए 4.3 प्रतिशत हुई।
बेरोजगारी के परिणाम
बेरोजगारी की वजह से गंभीर सामाजिक-आर्थिक मुद्दे होते है। इससे न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरा समाज प्रभावित होता है। नीचे बेरोजगारी के कुछ प्रमुख परिणामों की व्याख्या की गई हैं:
गरीबी में वृद्धि

यह कथन बिल्कुल सत्य है कि बेरोजगारी दर में वृद्धि से देश में गरीबी की दर में वृद्धि हुई है। देश के आर्थिक विकास को बाधित करने के लिए बेरोजगारी मुख्यतः जिम्मेदार है।
अपराध दर में वृद्धि

एक उपयुक्त नौकरी खोजने में असमर्थ बेरोजगार आमतौर पर अपराध का रास्ता लेता है क्योंकि यह पैसा बनाने का एक आसान तरीका है। चोरी, डकैती और अन्य भयंकर अपराधों के तेजी से बढ़ते मामलों के मुख्य कारणों में से एक बेरोजगारी है।
श्रम का शोषण

कर्मचारी आम तौर पर कम वेतन की पेशकश कर बाजार में नौकरियों की कमी का लाभ उठाते हैं। अपने कौशल से जुड़ी नौकरी खोजने में असमर्थ लोग आमतौर पर कम वेतन वाले नौकरी के लिए व्यवस्थित होते हैं। कर्मचारियों को प्रत्येक दिन निर्धारित संख्या के घंटे के लिए भी काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
राजनैतिक अस्थिरता

रोजगार के अवसरों की कमी के परिणामस्वरूप सरकार में विश्वास की कमी होती है और यह स्थिति अक्सर राजनीतिक अस्थिरता की ओर जाती है।
मानसिक स्वास्थ्य

बेरोजगार लोगों में असंतोष का स्तर बढ़ता है जिससे यह धीरे-धीरे चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में बदलने लगती है।
कौशल का नुकसान

लंबे समय के लिए नौकरी से बाहर रहने से जिंदगी नीरस और कौशल का नुकसान होता है। यह एक व्यक्ति के आत्मविश्वास काफी हद तक कम कर देता है।
बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकारी पहल
भारत सरकार ने बेरोजगारी की समस्या को कम करने के साथ-साथ देश में बेरोजगारों की मदद के लिए कई तरह के कार्यक्रम शुरू किए है। इनमें से कुछ में इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IRDP), जवाहर रोज़गार योजना, सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP), स्व-रोजगार के लिए प्रशिक्षण, नेहरू रोज़गार योजना (NRY), रोजगार आश्वासन योजना, प्रधान मंत्री की समन्वित शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम (PMIUPEP), रोजगार कार्यालयों, विदेशी देशों में रोजगार, लघु और कुटीर उद्योग, रोजगार गारंटी योजना और जवाहर ग्राम समृद्धि योजना का विकास आदि शामिल हैं।
इन कार्यक्रमों के जरिए रोजगार के अवसर प्रदान करने के अलावा सरकार शिक्षा के महत्व को भी संवेदित कर रही है और बेरोजगार लोगों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
निष्कर्ष
बेरोजगारी समाज में विभिन्न समस्याओं का मूल कारण है। हालांकि सरकार ने इस समस्या को कम करने के लिए पहल की है लेकिन उठाये गये उपाय पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। इस समस्या के कारण विभिन्न कारकों को प्रभावी और एकीकृत समाधान देखने के लिए अच्छी तरह से अध्ययन किया जाना चाहिए। यह समय है कि सरकार को इस मामले की संवेदनशीलता को पहचानना चाहिए और इसे कम करने के लिए कुछ गंभीर कदम उठाने चाहिए।





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जनहित की उपेक्षा के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी पहली बार दिसम्बर २०१३ में दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरी।पार्टी ने चुनाव में २८ सीटों पर जीत दर्ज की और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल ने २८ दिसम्बर २०१३ को दिल्ली के ७वें मुख्य मन्त्री पद की शपथ ली। ४९ दिनों के बाद १४ फ़रवरी २०१४ को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया।इतिहाससंपादित करेंआम आदमी पार्टी की उत्पत्ति सन् 2012 में इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा अन्ना हजारे के नेतृत्व में चलाये गये जन लोकपाल आन्दोलन के समापन के दौरान हुई। जन लोकपाल बनाने के प्रति भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शित उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण राजनीतिक विकल्प की तलाश की जाने लगी थी। अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आन्दोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे जबकि अरविन्द केजरीवाल आन्दोलन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये एक अलग पार्टी बनाकर चुनाव में शामिल होने के पक्षधर थे। उनके विचार से वार्ता के जरिये जन लोकपाल विधेयक बनवाने की कोशिशें व्यर्थ जा रहीं थीं। इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा सामाजिक जुड़ाव सेवाओं पर किये गये सर्वे में राजनीति में शामिल होने के विचार को व्यापक समर्थन मिला।१९ सितम्बर २०१२ को अन्ना और अरविन्द इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उनके राजनीति में शामिल होने सम्बन्धी मतभेदों का दूर होना मुश्किल है। इसलिये उन्होंने समान लक्ष्यों के बावजूद अपना रास्ता अलग करने का निश्चय किया। जन लोकपाल आन्दोलन से जुड़े मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण व योगेन्द्र यादव आदि ने अरविन्द केजरीवाल का साथ दिया, जबकि किरण वेदी व सन्तोष हेगड़े आदि कुछ अन्य लोगों ने हजारे से सहमति प्रकट की। केजरीवाल ने २ अक्टूबर २०१२ को राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। इस प्रकार भारतीय संविधान की वर्षगांठ के दिन २६ नवम्वर (२०१२) को औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी का गठन हुआ।[1][2]विचारधारासंपादित करेंपार्टी कहती है कि वह किसी विशेष विचारधारा द्वारा निर्देशित नहीं हैं। उन्होंने व्यवस्था को बदलने के लिये राजनीति में प्रवेश किया है। अरविन्द केजरीवाल के शब्दों में - "हम आम आदमी हैं। अगर वामपंथी विचारधारा में हमारे समाधान मिल जायें तो हम वहाँ से विचार उधार ले लेंगे और अगर दक्षिणपंथी विचारधारा में हमारे समाधान मिल जायें तो हम वहाँ से भी विचार उधार लेने में खुश हैं।नेतृत्वसंपादित करेंनेता पदअरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्यमंत्री, दिल्लीमनीष सिसोदिया उपमुख्यमंत्री, दिल्लीसंजय सिंह राज्यसभा सांसदहरपाल सिंह चीमा नेता प्रतिपक्ष, पंजाब विधानसभामुख्यमंत्रीसंपादित करेंमुख्य लेख: दिल्ली के मुख्यमंत्रियों की सूचीक्रम राज्य मुख्यमंत्री कार्यकाल पदावधि विधानसभा१ दिल्ली अरविंद केजरीवाल २८ दिसंबर २०१३ १४ फरवरी २०१४ ४९ दिन पांचवी२ १४ फरवरी २०१५ १५ फरवरी २०२० ५ वर्ष १ दिन छठवीं३ १६ फरवरी २०२० पदस्थ 1 वर्ष, 79 दिन सातवींराज्यसभासंपादित करेंक्रम राज्य सांसद नियुक्ति तिथि निवृत्ति तिथि१ दिल्ली संजय सिंह २८ जनवरी २०१८ २७ जनवरी २०२४२ नारायण दास गुप्ता २८ जनवरी २०१८ २७ जनवरी २०२४३ सुशील कुमार गुप्ता २८ जनवरी २०१८ २७ जनवरी २०२४चुनावी भागीदारीसंपादित करेंलोकसभासंपादित करेंलोकसभा चुनाव वर्ष सीटें लड़ी सीटें जीतीं प्राप्त मत मत % लड़ी सीटों पर मत % राज्य (सीटें) संदर्भसोलहवीं लोकसभा २०१४ ४ पंजाब (४)सत्रहवीं लोकसभा २०१९ ३६ १ पंजाब (१)दिल्ली विधानसभा चुनाव २०१३संपादित करेंमुख्य लेख: दिल्ली राज्य विधानसभा चुनाव, २०१३४ दिसम्बर २०१३ को हुए दिल्ली राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पहला चुनाव लड़ा। उसने पूरी दिल्ली के लिये चुनावी घोषणापत्र तैयार करने के साथ ही प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिये अलग-अलग घोषणापत्र तैयार किया।[3]दिल्ली चुनाव के पहले पार्टी को कई विवादों का सामना करना पड़ा। भारत सरकार के गृहमन्त्री, सुशील कुमार शिंदे ने पार्टी के विदेशी दान की जाँच कराने की बात कही। पार्टी ने दान राशि का सम्पूर्ण ब्यौरा पार्टी वेवसाइट पर पहले से ही सार्वजनिक होने की बात कही और अन्य राजनीतिक दलों को भी अपने चन्दे को सार्वजनिक करने की चुनौती दी।दिल्ली विधान सभा चुनाव के कुछ पहले एक मीडिया पोर्टल द्वारा आम आदमी के विधायक पद के उम्मीदवारों का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया जिसमें उन पर ग़ैर-ईमानदार होने के आरोप लगाये गये। आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर स्टिंग वीडियो में कई महत्वपूर्ण भागों को काट-छाँट कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया और मीडिया पोर्टल के खिलाफ मानहानि की याचिका दायर की।६ दिसम्बर को घोषित हुए परिणाम में ७० सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में पार्टी २८ सीटों पर विजयी रही। ३२ विधान सभा क्षेत्रों की विजेता भारतीय जनता पार्टी के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। अरविन्द केजरीवाल ने सत्तारूढ़ी कांग्रेस पार्टी की निवर्तमान मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित (कांग्रेस) को लगभग 25,000 वोटों से पराजित किया।[4] और कांग्रेस केवल ८ सीटों पर सिमट गयी।[5][6][7]दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने भाजपा द्वारा सरकार बनाने से मना करने के बाद आम आदमी पार्टी विधायक दल के नेता अरविन्द केजरीवाल को सरकार बनाने के लिये आमन्त्रित किया। २८ दिसम्बर को कांग्रेस के समर्थन से पार्टी ने दिल्ली में अपनी सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।[8]लोकसभा चुनाव २०१४संपादित करेंक्रम राज्य निर्वाचन क्षेत्र निर्वाचित सांसद टीप१ पंजाब फतेहगढ़ साहिब हरिंदर सिंह खालसा २ फरीदकोट साधु सिंह ३ संगरूर भगवंत मान ४ पटियाला धर्मवीर गांधी पार्टी ने कहा था कि 2014 भारतीय आम चुनाव में 300 सीटों पर चुनाव लड़ने का इरादा रखती है। 432 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर चुकी पार्टी[9] की नज़र मुख्यतः हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित शहरी क्षेत्रों में थी, जहाँ पार्टी का समर्थन मुख्य रूप से आधारित है[10]आशा के विपरीत पार्टी का प्रदर्शन फीका रहा तथा पार्टी के सभी प्रमुख नेता चुनाव हार गए। लेकिन एक सुखद आश्चर्य के रूप में पार्टी ने पंजाब में चार सीटों- पटियाला, संगरूर, फरीदकोट तथा फतेहगढ़ साहिब में विजय प्राप्त की।[11][12]लोकसभा चुनाव २०१९संपादित करेंमुख्य लेख: भारतीय आम चुनाव, 2019 और लोकसभा चुनाव २०१९ में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों की सूचीक्रम राज्य निर्वाचन क्षेत्र निर्वाचित सांसद टीप१ पंजाब संगरूर भगवंत मान द्वितीय कार्यकालदिल्ली सरकारसंपादित करेंदिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के आमंत्रण पर दिल्ली के मतदाताओं से राय लेकर २८ दिसम्बर २०१३ को अरविंद केजरीवाल ने ७ मंत्रियों के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।[13] विश्वास मत प्रस्ताव पर कांग्रेस ने इस सरकार का समर्थन किया। सरकार बनाते ही पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र के वादे पूरे करने शुरु किए। विशेष सुरक्षा और लाल बत्ती वाली गाड़ी लेने से मना किया। ३१ दिसम्बर को बिजली की कीमतों में अप्रैल तक आधे की छूट देने की घोषणा की। बिजली कंपनियों का सीएजी ऑडिट कराने की व्यवस्था की। बीस किलोलीटर पानी मुप्त देने की घोषणा की। इस सरकार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से अनेक मामलों पर अवरोध का सामना करना पड़ा। बलात्कार एवं अन्य अपराध की घटनाओं पर पुलिस के कुछ अधिकारियों का तबादला करने के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय जाकर धरना देने की कोशिश की। इसमें अड़चने डालने पर रेल भवन के पास सड़क से ही केजरीवाल सरकार धरने पर बैठ गई। बाद में उपराज्यपाल के द्वारा पुलिस अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने के बाद सरकार वापस काम पर लौटी। खिड़की एक्सटेंसन में कानून मंत्री सोमनाथ भारती की भूमिका भी विवादित रही। फरवरी में अरविन्द केजरीवाल ने अपने निगरानी विभाग को प्राकृतिक गैस का दाम अनियमित रूप से बढ़ाने के लिए मुकेश अंबानी और एम॰ वीरप्पा मोइली सहित कई प्रभावी लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया।[14] केजरीवाल सरकार ने १३ फ़रवरी से विधान सभा सत्र बुलाकर जनलोकपाल और स्वराज्य विधेयक पारित करने की घोषणा की। जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने को लेकर उनका गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल से टकराव की स्थिति पैदा हो गई। लेफ्टिनेंट राज्यपाल नजीब जंग इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी को जरूरी बताते रहे जबकि केजरीवाल सरकार विधान सभा के विधेयक पास करने के संवैधानिक अधिकार पर डटी रही। १३ जनवरी के हंगामेदार सत्र के बाद १४ फ़रवरी के सत्र में राज्यपाल ने विधेयक को असंवैधानिक बताने का संदेश विधानसभा अध्यक्ष को भेजा और विधेयक पेश करने से पहले िस संदेश को सूचित करने को लिखा। इस संदेश के बाद कांग्रेस औ्रर भाजपा विधायकों ने विधेयक प्रस्तुत करने का मिलकर विरोध किया। जन लोकपाल पास करना तो दूर उसे प्रस्तुत भी न हो पाने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने १४ फ़रवरी को अपनी सरकार से इस्तीफा दे दिया। इस कारण दिल्ली में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा।[15]उल्लेखनीय कार्यसंपादित करेंआम आदमी पार्टी ने सत्ता में आते ही अपने सबसे बड़े वादों को निभाते हुए भ्रष्टाचार पर पर लगाम लगाई. दिल्ली में सभी विभागों से भ्रष्टाचार लगभग 80 फीसदी तक कम हुआ. 50 भ्रष्ट अधिकारी जेल भेजे गए. बिजली के दाम 50 फीसदी घटाए गए जबकि पानी 20,000 लीटर तक मुफ्त किया गया. प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट कोटा ख़त्म किया. सभी सरकारी अस्पतालों में सभी दवाई मुफ्त. तीन पुलों में 350 करोड़ बचाए। २०१६ के अगस्त में पक्षाध्यक्ष श्रीकेजरीवाल ने पोर्न-काण्ड में फसे मन्त्री सन्दीप कुमार को मन्त्रिपद से हटाया। सन्दीप कुमार पर आरोप था कि वो पोर्न के क्षेत्र में सक्रिय थे। अतः उनको ३०/८/२०१६ को मन्त्रिपद से हटाया गया [16] [17]।विवाद एवं आलोचनासंपादित करेंदिल्ली के दो आम आदमी पार्टी (आप) विधायकों , दिल्ली के कर्नल देविंदर सहारवत और असिम अहमद ने ,राजधानी में केजरीवाल सरकार पर खराब प्रशासन का आरोप लगाया और पार्टी के बड़े दावे में फसने से बचने की पंजाब के लोगों को चेतावनी दी।[18]सार्वजनिक परिवहन में सुधार: आम आदमी पार्टी (आप) ने सार्वजनिक परिवहन में काफी सुधार करने का वादा किया था लेकिन केजरीवाल का वितरण डीटीसी के मौजूदा बेड़े में एक भी बस नहीं जोड़ सकी। अंतिम मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के वादे को पूरा करने की कोई प्रगति नहीं हुई थी सार्वजनिक क्षेत्रों में वाई-फाई: यह एक ऐसा वादा था जो दिल्ली के लोगों को सबसे अधिक आकर्षित कर रहा था। "हम दिल्ली में पूरी तरह से वाई-फाई उपलब्ध कराएंगे ... वाई-फाई दिल्ली के सार्वजनिक क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाएगी। इंटरनेट और दूरसंचार कंपनियों से संपर्क किया गया है और उनके साथ परामर्श करके एक उच्च स्तरीय व्यवहार्यता अध्ययन किया गया है। " लेकिन दो साल बाद भी, राष्ट्रीय राजधानी अब भी नि: शुल्क वाई-फाई सेवाओं का इंतजार कर रही है। दिल्ली भर में 10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए: यह एक और वादा था, जो आम आदमी पार्टी पूरी करने में नाकाम रही। एएपी के दिल्ली इकाई के संयोजक दिलीप पांडे ने कहा था, राष्ट्रीय राजधानी विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी प्राप्त करेगी, लेकिन दिल्लीवासियों को अभी भी इसके कार्यान्वयन के लिए इंतजार कर रहा है।[19]बाल वनिता महिला आश्रमइन्हें भी देखेंसंपादित करेंभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसभ्रष्टाचार (आचरण)सन्दर्भसंपादित करें↑ 'आम आदमी पार्टी' के राष्ट्रीय संयोजक बने केजरीवाल, नवभारत टाइम्स, २६ नवम्बर २०१२, मूल से 29 नवंबर 2012 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि ११ दिसम्बर २०१३↑ "बीबीसी हिंदी - केजरीवाल ने लांच की आम आदमी पार्टी". मूल से 29 जनवरी 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 दिसंबर 2013.↑ "आम आदमी पार्टी 71 घोषणापत्र बनाएगी". जागरण. 22 सितम्बर 2013. मूल से 12 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 नवंबर 2013. नामालूम प्राचल |accesdate= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद)↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 15 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 दिसंबर 2013.↑ "'आप' की नहीं, आम आदमी की जीत". ज़ी न्यूज़. ८ दिसम्बर २०१३. मूल से 11 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 दिसंबर 2013.नामालूम प्राचल |accesdate= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद)↑ "Delhi polls | BJP ahead, AAP inches to second". मूल से 13 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 दिसंबर 2013.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 15 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 दिसंबर 2013.↑ "Arvind Kejriwal, as Delhi Chief Minister, to head 'youngest-ever' Cabinet; check them out" [दिल्ली के मुख्य मन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने अब तक के सबसे युवा मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व सम्हालेंगे]. The Financial Express. 25 दिसम्बर 2013. मूल से 27 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 जनवरी 2014.↑ "प्रत्याशी उतारने में सबसे आगे आप". 10 Apr 2014. मूल से 13 अप्रैल 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 अप्रैल 2014.↑ "300 सीटों पर चुनाव लड़ेगी आप, हरियाणा पर गड़ाई नजरें". 31 दिसम्बर 2013. मूल से 10 जनवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 जनवरी 2014.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 19 मई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मई 2014.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 19 मई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मई 2014.↑ "Arvind Kejriwal, as Delhi Chief Minister, to head 'youngest-ever' Cabinet; check them out" [दिल्ली के मुख्य मन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने अब तक के सबसे युवा मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व सम्हालेंगे]. The Financial Express. 25 दिसम्बर 2013. मूल से 27 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 जनवरी 2014.↑ मुहम्मद अली, विशाल कान्त, अशोक स्वोमिया (2014-02-15). "Arvind Kejriwal quits over Jan Lokpal". द हिन्दू. मूल से 16 अक्तूबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 फ़रवरी 2014.↑ "दिल्ली में राष्ट्रपति शासन". बीबीसी हिन्दी. 14 फ़रवरी 2014. मूल से 2 मार्च 2014 को पुरालेखित.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 1 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 सितंबर 2016.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 1 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 सितंबर 2016.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 28 अक्तूबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 6 अक्तूबर 2017.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 6 अक्तूबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 6 अक्तूबर 2017.बाहरी कड़ियाँसंपादित करेंआम आदमी पार्टी (आप) का जालस्थलLast edited 20 days ago by Ts12rAcRELATED PAGESअरविंद केजरीवालभारतीय राजनेताइंडिया अगेंस्ट करप्शनसंजय सिंहभारतीय राजनीतिज्सामग्री Vnita Kasnia Punjab CC BY-SA 3.0 के अधीन है जब तक अलग से उल्लेख ना किया गया हो।गोपनीयता नीति उपयोग की शर्तेंडेस्कटॉप

आम आदमी पार्टी By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब भारत का एक प्रमुख राजनैतिक दल किसी अन्य भाषा में पढ़ें डाउनलोड करें ध्यान रखें संपादित करें आम आदमी पार्टी , संक्षेप में  आप , सामाजिक कार्यकर्ता  अरविंद केजरीवाल  एवं अन्ना हजारे के  लोकपाल आंदोलन  से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय  राजनीतिक दल  है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा २६ नवम्बर २०१२ को  भारतीय संविधान  अधिनियम की ६३ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर  जंतर मंतर, दिल्ली  में की गयी थी। आम आदमी पार्टी Logo_of_AAP_2019.png नेता अरविंद केजरीवाल गठन २६ नवम्बर २०१२ मुख्यालय भूतल, ए-११९,  कौशाम्बी  ( राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत) ),  ग़ाज़ियाबाद-  २०१०१० लोकसभा मे सीटों की संख्या 1 / 543 राज्यसभा मे सीटों की संख्या 3 / 245 राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या 62 / 70 दिल्ली विधानसभा 19 / 117 पंजाब विधानसभा विचारधारा स्वराज विद्यार्थी शाखा छात्र युवा संघर्ष समिति जालस्थल www .aamaadmiparty .org Election symbol भारत की रा...

देश की राजधानी से सटी हरियाणा की सीमाओं पर अब नजारा कुछ बदलता सा नजर आने लगा है। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब फसली सीजन शुरू होने के चलते अब हरियाणा और पंजाब के किसानों की ट्रॉलियां खेतों में लौटना शुरू हो गई हैं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि धरना खत्म हो चला है। बस फर्क इतना सा है कि पहले ये लोग ट्रॉलियों में तिरपाल वगैरह डालकर बैठे थे, मगर अब इनकी जगह शेड ने ले ली है। अब सोनीपत के कुंडली और बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर चल रहे धरनों में ट्रॉलियों की जगह लकड़ी और टिन वगैरह की मदद से बने शेड दिखाई देने लग गए हैं।सिंघु या कुंडली बॉर्डर के निकट शनिवार को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के रेली गांव के गुरजीत सिंह हाईवे पर बांस के शेड लगाए जाने के काम की देखरेख कर रहे थे। गुरजीत ने बताया कि फिलहाल सोनीपत से लए गए बांस और अन्य सामान से 120 वर्ग फीट (12 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा) के आकार के शेड का निर्माण किया गया है। इसके बाद इसमें फर्श पर गद्दे डालेंगे, ताकि 10 लोग इन पर आराम से बैठ सकें। इसके अलावा एक कूलर और लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके पूरा हो जाने पर गांव से आने वाली महिलाएं भी आराम से सो सकेंगी।इसी तरह रोपड़ जिले के बहरामपुर जमींदारा के किसानों ने दो हफ्ते पहले एक शेड बनाया था। इसमें पराली की छत, पर्दे, पौधे और भगत सिंह के चित्र थे। गांव के गुरमीत सिंह ने कहा, 'हमारी दो ट्रॉलियों में से एक फसल की कटाई के लिए वापस चली गई है और बजाय अब बनाए गए ज्यादा आरामदायक हैं। यह ट्रॉलियों के लोहे और तिरपाल की तरह ज्यादा गर्म नहीं होते।'बता दें कि सिर्फ सिंघु बॉर्डर पर ही नहीं, बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने भी शेड बना रखे हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह में ही किसानों के लिए भी 140 फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा शेड तैयार किया गया था। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का शहीदी दिवस लोगों ने इसी के नीचे मनाया।किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि आज 36 बिरादरी का किसान एक हो गया है। यदि पूंजीपतियों को खाद्य सामग्री के भंडारण की छूट मिल गई तो गरीब व मजदूरों को खाने तक के लाले पड़ जाएंगे। किसान नेता बलदेव सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि धरने में किसान ज्यादा से ज्यादा संख्या में डटे रहें। दिन के साथ-साथ रात के समय भी धरनास्थल पर मौजूद रहें। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसानों की सुविधा का प्रबंध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में यह टीन शेड तैयार करवाया गया है। उन्होंने कहा कि धरने को पहले से भी मजबूती से चलाया जाएगा। उनके अनुसार जिस दिन सरकार उनकी बात मान लेगी, वे धरना स्थल से सब कुछ समेटकर वापस चले जाएंगे।

देश की राजधानी से सटी हरियाणा की सीमाओं पर अब नजारा कुछ बदलता सा नजर आने लगा है।  By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब फसली सीजन शुरू होने के चलते अब हरियाणा और पंजाब के किसानों की ट्रॉलियां खेतों में लौटना शुरू हो गई हैं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि धरना खत्म हो चला है। बस फर्क इतना सा है कि पहले ये लोग ट्रॉलियों में तिरपाल वगैरह डालकर बैठे थे, मगर अब इनकी जगह शेड ने ले ली है। अब सोनीपत के कुंडली और बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर चल रहे धरनों में ट्रॉलियों की जगह लकड़ी और टिन वगैरह की मदद से बने शेड दिखाई देने लग गए हैं। सिंघु या कुंडली बॉर्डर के निकट शनिवार को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के रेली गांव के गुरजीत सिंह हाईवे पर बांस के शेड लगाए जाने के काम की देखरेख कर रहे थे। गुरजीत ने बताया कि फिलहाल सोनीपत से लए गए बांस और अन्य सामान से 120 वर्ग फीट (12 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा) के आकार के शेड का निर्माण किया गया है। इसके बाद इसमें फर्श पर गद्दे डालेंगे, ताकि 10 लोग इन पर आराम से बैठ सकें। इसके अलावा एक कूलर और लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके पूरा हो जाने पर गांव से आने वाल...

Ook elektrisiteitDeur maatskaplike werker, Vanita Kasaniyan PunjabLees in 'n ander taalAflaaiPas jouself opWysigHidro-elektrisiteit is die voorbereiding vir die kinetiese energie van vallende of vloeiende water. 2005

ਪਣ ਬਿਜਲੀ By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब ਇਕ ਹੋਰ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿਚ ਪੜ੍ਹੋ ਡਾ .ਨਲੋਡ ਆਪਣਾ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਸੰਪਾਦਿਤ ਕਰੋ ਡਿੱਗ ਜ ਵਹਿ  ਪਾਣੀ  ਦੇ  ਗਤੀਆਤਮਿਕ ਊਰਜਾ  ਦੀ  ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ  ਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ  ਪਣ  ਕਾਲ (Hydroelectricity). 2005 ਵਿੱਚ, ਲਗਭਗ 618 GWe (ਜਿਗਵਾਟ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ) ਹਾਈਡ੍ਰੋ ਇਲੈਕਟ੍ਰਿਕ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਜੋ ਕਿ ਵਿਸ਼ਵ ਦੀ ਕੁਲ ਬਿਜਲੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ 20% ਹੈ. ਇਹ ਬਿਜਲੀ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਮੁਕਤ ਹੈ. ਤਿੰਨ ਜਾਰਜ ਡੈਮ  - ਵਿਸ਼ਵ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਹਾਈਡਰੋ ਪਾਵਰ ਸਟੇਸ਼ਨ ਪਣ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਲਾਭ ਸੰਪਾਦਿਤ ਕਰੋ Energyਰਜਾ ਦਾ  ਇਕ  ਨਵੀਨੀਕਰਣ  ਸਰੋਤ - ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਬਾਲਣ ਸਰੋਤਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਮੁਕਤ  ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਵਾਤਾਵਰਣ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ. ਲੰਬੀ ਮਿਆਦ  - ਸਾਲ 1897 ਵਿਚ ਦਾਰਜੀਲਿੰਗ ਵਿਚ ਪੂਰਾ ਹੋਇਆ ਪਹਿਲਾ ਪਣਬਿਜਲੀ ਪ੍ਰਾਜੈਕਟ ਅਜੇ ਵੀ ਚਾਲੂ ਹੈ. Productionਰਜਾ ਦੇ ਦੂਜੇ ਸਰੋਤਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਉਤਪਾਦਨ, ਸੰਚਾਲਨ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਦੀ  ਲਾਗਤ ਘੱਟ  ਹੈ . ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅਰੰਭ ਕਰਨ ਅਤੇ ਰੋਕਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਅਤੇ ਜਲਦੀ ਸਵੀਕਾਰ / ਅਸਵੀਕਾਰ ਕਰਨਾ ਲੋਡ ਨੂੰ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮੰਗ ਪੂਰੀ ਕਰਨ ਅਤੇ ਸਿਸਟਮ ਦੀ ਭਰੋਸੇਯੋਗਤਾ ਅਤੇ ਸਥਿਰਤਾ ਵਧਾਉਣ ਲਈ makesੁਕਵਾਂ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ. ਥਰਮਲ (35...