कौन कौन सी तकनीके हैं, जो केवल भारत के पास है? By वनिता कासनियां पंजाब द्वारा आज के प्रगतिशील देश तकनीक के माध्यम से एक दूसरे से इतने बेहतर तरीके से जुड़े हुये है, की ऐसा बहुत कम देखने मे आता है की किसी देश ने कोई तकनीक विकसित की और वो सिर्फ उस देश तक ही सीमित रह जाये। लंबी अवधि के व्यापक आर्थिक विकास के लिए नई तकनीक को अपनाना आवश्यक है। इसीलिए कोई भी विकसित देश नहीं चाहेगा कि तकनीके सिर्फ उसी के पास रहें। वो ज्यादा से ज्यादा इसे दूसरे देशो में फैलाकर इससे लाभ लेने के चक्कर मे रहता है। ऐसा सिर्फ सैन्य ताकतो के मामलो मे ही होता है जब कोई देश अपने देश की सुरक्षा के लिए ऐसी तकनीकों का निर्माण करे, जो और किसी के पास ना हो। और अपने देश भारत मे तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई तकनीक विकसित हुई हो, और उसे हमने छुपा कर रखा हो। इसका कारण दुनियाँ मे अपना सिक्का जमाना या पैसा कमाना नहीं है, बल्कि भारतीयों मे नरमदिली का होना है। पुरातन काल से ही भारतीय वैज्ञानिकों और अन्वेषणकर्ताओं ने अपने आविष्कारों, खोजो और नीतियों को मुफ्त मे पूरी दुनियाँ मे यूँ ही बाँटा है। सारे देश के वैज्ञानिक कहाँ अपने द्वारा की गयी खोजो को पेटेंट कराकर अधिक से अधिक लाभ लेने के चक्कर मे रहते है, और कहाँ अपने देश के लोग किसी खोज को बिना पेटेंट कराये पूरी दुनिया की भलाई के लिए इन तकनीकों का श्रेय भी नहीं लेते है। ऐसे कई उदाहरण है, जब भारतीयो के आविष्कार बिना किसी लाभ के पूरी दुनिया के काम आए। कुछ उदाहरण देता हूँ- ☞ आप सभी ने यूएसबी (usb) को तो देखा ही होगा। चार्जर, माऊस, कीबोर्ड से लेकर बड़े बड़े गैजेट्स मे इसकी कितनी उपयोगिता ही, ये शायद मुझे बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन एक बात मुझे बताने की जरूरत पड़े कि, क्या आप जानते है कि इसका आविष्कार एक भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर आर्किटेक्ट अजय भट्ट ने किया था। वे चाहते तो अपने इस काम को पेटेंट कराकर करोड़ो मे रुपये कमाते या फिर ये तकनीक सिर्फ भारतीय कंपनियो तक सीमित रखते, लेकिन उन्होने टीम वर्क का बहाना बनाकर इसे मुफ्त मे पूरी दुनिया को इस्तेमाल करने के लिए छोड़ दिया। आप खुद ही सोचिए की करीब 10 मिलियन यूएसबी इस वक़्त पूरी दुनिया मे आपरेशनल है। ☞ दूसरी बात हम योग पर आते है। भारत योग कला की तकनीक का व्यवसायीकरण करके सिर्फ इसे भारत में ही सीमित रखता? ☞ तीसरी बात हम शल्य चिकित्सा पर आते है। क्या होता अगर विश्व के प्रथम सर्जन सुश्रुत ने दुनियाभर से आए डाक्टरों के साथ ये तकनीक साझा करने से मना कर दिया होता। भारत मे सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है, जिनहोने विश्व में पहली बार प्लास्टिक सर्जरी, राइनोप्लास्टिक सर्जरी और कैटेरेक्ट सर्जरी की थी, वो भी बिना किसी आधुनिक मशीनों के कई सौ सालो पहले। फिर यूरोपियन और बाकी जगहो के चिकित्सको ने उनके पास इस तरीके को सीखने के लिए आना शुरू कर दिया। सुश्रुत ने कभी भी किसी को निराश नहीं किया। सोच कर ही देखिये की आज विश्व की मेडिकल साइन्स भारत से कितनी पीछे होती अगर इस तकनीक का सिर्फ भारत मे ही इस्तेमाल होता? आप बेहतर कल्पना कर सकते है। तो आप ये बात तो असंभव ही समझिए की कोई तकनीक सिर्फ भारत मे ही रह जाये। आप चाहे तो इस बात से मूल्यांकन कर सकते है कौन सी तकनीके सबसे पहले सिर्फ भारतीयो द्वारा विकसित की गयी थी। समय भी लगेगा और दिमाग भी खर्च होगा, तो चलिये शुरु से शुरू करते है और ऐसी ही कुछ खोजो के बारे मे विस्तार से जानते है जो सिर्फ भारत मे ही हुई है। ✦ ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile) इस मिसाइल का निर्माण भारत मे हुआ है और फिलहाल इसका उपयोग सिर्फ भारत मे ही है। ब्रह्मोस एक मध्यम दूरी की रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बी, जहाजों, विमानों या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ (भारतीय सरकारी संस्था) ने रूस के साथ मिलकर बनाया है। इस मिसाइल मे उपयोग होने वाली तकनीक का इस्तेमाल इस वक़्त सिर्फ भारत की ही सेनाओ द्वारा हो रहा है। ब्रह्मोस नाम दो नदियों, भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम से बना है।ब्रह्मोस मिसाइल की अधिकतम गति लगभग 3,450 किमी प्रति घंटे या 2,148 मील प्रति घंटे है। ✦ लिविंग रूट ब्रिज (Living Root Bridge) दुनिया भर में कई ऐसे पुल हैं जो इंसानों की बेहतरीन संरचनाओ मे से माने जाते हैं! लेकिन भारत के मेघालय में लिविंग रूट ब्रिज को कुदरत और इंसान की बेहतरीन जुगलबंदी का बेहतरीन नमूना माना जाता है। ये पुल ज़िंदा पेड़ की मोटी और उलझी हुई जड़ो से बनाए जाते है। वे रबर और अंजीर के पेड़ की जड़ों से हस्तनिर्मित हैं। जिस पेड़ से यह बनता है, जब तक वह स्वस्थ रहता है, पुल में जड़ें स्वाभाविक रूप से मोटी और मजबूत होती जाती हैं। बताइये आपने कहीं सुनी है पूरी दुनिया मे ऐसी तकनीक जिससे हम पेड़ो की जड़ो को जहां चाहे मोड़ सकते है। इसे बनाने की तकनीक काफी पुरानी है और ये सिर्फ भारत के प्रशिक्षित खासी और जयंतिया जनजातियों द्वारा ही बनाए जाते है। पर्यावरण के मामले मे ये भारत की एक और उपलब्धि है जिस पर भारत गर्व कर सकता है, और इस बात पर भी, कि ऐसा सिर्फ भारत में होता है। ✦ भारतीय मार्स ओर्बिटर आप में से अधिकतर को ये पता होगा की भारत मंगल पर ओर्बिटर भेजने वाला दुनिया का चौथा देश है। और अपने पहले ही प्रयास मे मंगल तक पहुँचने वाला दुनिया का एकमात्र देश है। ये ऐसी उपलब्धि है जिस पर पूरा भारत इसरो पर गर्व कर सकता है। तो आखिर कौन सी ऐसी खास तकनीक थी हमारे ओर्बिटर में ? दरअसल भारत के पास इतना ताकतवर रॉकेट नहीं था, जो ओर्बिटर को सीधे ही मंगल की कक्षा मे पहुँचा दे लेकिन भारत ने ऐसी तकनीक अपनाइ कि मार्स मिशन का बजट हॉलीवुड की कई फिल्मों से भी सस्ता हो गया। उनमे से कुछ मुख्य है; ओर्बिटर को सीधे मार्स कि कक्षा मे पहुंचाने के बजाय विभिन्न ग्रहो कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग ओर्बिटर को गति प्रदान करने के लिए किया गया। MOM के प्रोब ने पृथ्वी की कक्षा में लगभग एक महीने का समय बिताया, जहां 30 नवंबर 2013 को मंगल की कक्षा मे जाने के लिए आखिरी इंजेक्शन से पहले सात अपभू-उठाने वाले कक्षीय युद्धाभ्यासों को एक सीरीज मे लांच किया गया। मंगल ग्रह पर 298 दिनों के पारगमन के बाद, इसे 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित किया गया था। ओर्बिटर को हल्का बनाने के लिए उसके कई फ्रेमों मे भारत मे निर्मित स्टील से भी हल्के संरचनाओं (एल्यूमिनियम और CFRP- विशेष प्रकार का प्लास्टिक फ़ाइबर) का निर्माण किया गया था। और ऐसा पहली बार सिर्फ भारत मे ही किया गया था। इसे कहते है सही मायनों में आपदा में अवसर तलाशना। ये सब आविष्कार तो ऐसे है जिनके बारे मे अधिकतर जानते है। लेकिन कुछ तकनीकों के बारे में अभी तक खुद कई भारतीयों को ही नहीं पता है। ऐसे सैकड़ो उदाहरण आप भारत के प्राचीन मंदिरों मे देख सकते है। मैं सबके बारे में लिखने बैठ जाऊ तो कई दिन लग जाएँगे। विदेशी पुरातत्वविदों ने इन रचनाओं को कोरी सजावट का सामान ही बताया है। उनके अनुसार ये सब सिर्फ किसी धार्मिक अंधविश्वास पर ही बनाए गए थे। लेकिन हाल मे हुई कुछ खोजो के आधार पर ये पूरी तरह वैज्ञानिक है और भारत के सारे मंदिरो के एक भी मूर्ति बिना वजह नहीं है, और कोरे अंधविश्वास पर तो बिलकुल नहीं। भारत के प्राचीन लेखो मे आग लगाकर इन्हे सिर्फ अध्यात्म से ही जोड़ा गया है, जो काफी दुखद है। ये खोज दुनिया मे इतने प्रसिद्ध हुए ही नहीं, सिर्फ विश्व के कुछ कागजी रिकार्डों मे इनका नाम दर्ज़ कर हमें वैश्विक संस्थाओं द्वारा केवल लोलीपोप दिखाया गया है। गलती से भी ऐसे मंदिरों के बारे मे कुछ जानने के लिए विकिपीडिया जैसे साइटों पर आँख मूंदकर भरोसा मत कीजिएगा। इनके पास भी ऐसी कई भ्रामक जानकारियाँ है इन मंदिरों के लिए। भारतीय सरकार और पुरातत्वविदों से कुछ उम्मीद ही करना बेकार है। मीडिया जैसे जागरूकता फैलाने वाले संस्थान तो बॉलीवुड मसाला, राजनीति की गरमागरम बहस और सांप्रदायिक मुद्दो से टीआरपी बनाने मे इतने व्यस्त है की वे भी इसे तभी दिखते है जब इनके पास न्यूज़ की कमी हो। एक कारण यह भी हो सकता है की हमारे पास इन खोजो के बारे मे रिसर्च करने से भी बड़ी समस्याएँ है, जिससे ये मुद्दे कहीं कोने मे दब से जाते है। आप सोच भी नहीं सकते की यदि ऐसी अद्भुत तकनीके किसी और विकसित देश मे होती तो वो अब तक इनको कितने बड़े रिसर्च सेंटर और पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित कर देता! ऐसे ही कुछ मंदिरो और इनमे इस्तेमाल हुये खास तकनीकों के बारे में हम यहाँ जानेंगे जो विश्व मे और कहीं नहीं पाये जाते है, और इनको बनाने की तकनीक की खोज अभी बाकी है। ✦ पत्थरो मे संगीत 🎶 भारत में संगीत का इतिहास काफी पुराना रहा है। वाद्ययंत्रों में और संगीत में जो कला भारतीयों ने हासिल की है, वो बेजोड़ है। कुछ दक्षिण-भारतीय मंदिरों में तो ऐसे पत्थर के खंभो का निर्माण किया गया है जो संगीत के अलग अलग त्वरण वाली ध्वनियाँ उत्पन्न करते है। आइये, आपको इसी विशेषता वाले कुछ मंदिरों की सैर कराता हूँ। ✧हम्पी हम्पी भारत में एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है। यह कर्नाटक में स्थित है, जो भारत का एक दक्षिण-पश्चिमी प्रांत है। यह राज्य की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 350 किमी उत्तर में स्थित है। हम्पी के खंडहर, जैसा कि आज भी जाना जाता है, इतिहास, वास्तुकला और धर्म का एक विशाल संग्रहालय है। यह 25 वर्ग किमी से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ मंदिरों, महलों, बाजार की सड़कों, किलेबंदी, जलीय संरचनाओं और प्राचीन स्मारकों की बहुतायत है। हम्पी में विजया विट्ठल मंदिर में 56 संगीत स्तंभ हैं जिन्हें सारेगामा स्तंभ भी कहा जाता है। सा, रे, गा, मा, सात संगीत नोटों में से चार हैं। अंगूठे से टकराने पर ये स्तंभ संगीतमय स्वर उत्पन्न करते हैं। ऐसा लगता है जैसे घंटी बज रही हो। इन स्तंभों के भूवैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि चट्टानें न केवल धात्विक अयस्क की उपस्थिति के कारण बल्कि बड़ी मात्रा में सिलिका के कारण भी इस तरह गुंजयमान हैं। ✧ श्री विजया विट्ठल मंदिर संगीत के स्तंभों को हिंदू कला की अनूठी स्थापत्य कलाओं में से एक माना जाता है। मूर्तिकारों ने अपने मूर्तिकला के साथ-साथ संगीत कौशल का भी उनमें निवेश किया है। श्री विजया विट्ठल मंदिर १५वीं शताब्दी में बनाया गया था जिसमें ५६ संगीत स्तंभ हैं। ✧ नेल्लईअप्पर मंदिर तिरुनेलवेली के नेल्लईअप्पर मंदिर में, 4 संगीत स्तंभ हैं। उनके पास एक केंद्रीय स्तंभ है जिसके चारों ओर अलग-अलग चौड़ाई के 48 छोटे बेलनाकार स्तंभ हैं। जब उन्हें किसी चीज़ से टैप किया जाता है तो वे अलग-अलग आवाजें देते हैं। आप लोगो में से कई लोग अलग अलग देशों मे जा चुके होंगे और वहाँ की कई प्रसिद्ध चीज़ों को भी देखा होगा, लेकिन ऐसे विशाल पत्थर के खंभो मे कभी संगीत के सुरों का समागम देखा है? ये तकनीक यकीनन सिर्फ भारतीयो के पास ही थी। यहीं नहीं, कई मंदिरो मे पत्थरों की चैन भी बनाई गयी है, जो आज की तकनीक के हिसाब से बिना पत्थरो के पिघलाए नामुमकिन है। कई मंदिरों के गहन विश्लेषण और स्थानीय लेखो को पढ़ने के बाद ये साबित हो चुका है कि सिर्फ भारतीयों के पास ही इस तरह के प्त्थरो को पिघलाने कि तकनीक थी। इतिहास मे और गहराई तक जाएंगे तो और भी कई ऐसे आविष्कार और है जिनकी उत्पत्ति और उत्पादन यदि भारत तक ही सीमित होती तो निश्चय ही दुनिया थोड़ी कम विकसित होती। वनिता कासनियां पंजाब 🌹🙏🙏🌹 आशा करती हूँ की आप सभी को ये प्रयास पसंद आया होगा। लेख लिखने में समय तो लगा पर कुछ शिक्षाप्रद लिख कर अच्छा लग रहा है। इतने लंबे लेख को पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद! माना, की अपने भारत मे समस्याए थोड़ी ज्यादा है, लेकिन आश्चर्य और गर्व करने लायक बातें तो उससे भी ज्यादा है। जैसा भी है, हमारा देश हमें बहुत प्यारा है... जय हिन्द, जय भारत ! 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जय श्री माता दी 🙏❤️ ‼️🔱༺꧁ #जय_मां_ #महागौरी ꧂༻🔱‼️ दरबार के सभी 🔱🎪 प्रभु भक्तों को दुर्गा अष्टमी की 🔱🎪 हार्दिक शुभकामनाएं🎪🔱 ⚜▬▬▬▬▬▬॥🕉॥▬▬▬▬▬▬⚜ ‼️या देवी सर्वभू‍तेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता‼️ ‼️नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः‼️ ⚜▬▬▬▬▬▬॥🐯॥▬▬▬▬▬▬⚜ ༺꧁ #ॐ_देवी_ #महागौरी_नमः꧂༻ 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 #काश_हर_सुबह___ #नवरात्र_सी___होती...!! #हर___किसी___की___नज़र___मे___बेटियां #देवी_______सी_______होती...!!! 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 महागौरी पूजा दुर्गा अष्टमी एवम् कन्या पूजन कि ढेरों शुभकामनाएं माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। 🙏🌺🔱🚩 🌹🙏 #जय_माता_दी 🙏🏻🌹 #राम_नवमी_30_मार्च_2023_को_है:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं. जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग, उपाय, राम नवमी पर बन रहे हैं 5 अति दुर्लभ योग, जानें डेट, पूजा का मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. ये चैत्र नवरात्रि का नौवां और आखिरी दिन होता है. इस दिन राम मंदिर श्रीराम का भव्य श्रृंगार होता है. रामलला के जन्म के वक्त विधि विधान से पूजा की जाती है और ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं. इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है. आइए जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग. #राम_नवमी_शुभ_मुहूर्त:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 29 मार्च 2023 को रात 09 बजकर 07 मिनट पर आरंभ हो रही है. नवमी तिथि की समाप्ति 30 मार्च 2023 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगी. #राम_लला_की_पूजा_का_मुहूर्त:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 सुबह 11:17 - दोपहर 01:46 (अवधि 02 घण्टे 28 मिनट्स) अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12.01 - दोपहर 12.51 #राम_नवमी_शुभ_योग:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 राम नवमी पर इस बार 5 शुभ योग गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरुवार का संयोग बन रहा है. राम नवमी के दिन इन पांचों योग के होने से श्रीराम की पूजा का शीघ्र फल मिलेगा साथ ही इस दिन किए तमाम कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त होगी. #गुरु पुष्य योग:- 30 मार्च 10.59 - 31 मार्च सुबह 06.13 #अमृत_सिद्धि_योग:- 30 मार्च, 10.59 - 31 मार्च,सुबह 06.13 #सर्वार्थ_सिद्धि_योग_पूरे_दिन #रवि_योग_पूरे_दिन गुरुवार श्रीराम भगवान विष्णु के 7वें अवतार हैं और गुरुवार का दिन विष्णु जी को अति प्रिय है. ऐसे में राम जन्मोत्सव गुरुवार के दिन होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। #राम_नवमी_के_दिन_क्या_करें:- 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में नभगवान श्रीराम का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें. फिर घर में रामायण का पाठ करें. कहते हैं जहां रामायण पाठ होता है वहां श्रीराम और हनुमान जी वास रहता है. इससे घर में खुशहाली आती है. धन वैभव की वृद्धि होती है. रामनवमी के दिन एक कटोरी में गंगा जल राम रक्षा मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचन्द्राय श्रीं नम:' का जाप 108 बार करें. अब घर के हर कोने-छत पर इसका छिड़काव करें. मान्यता है इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है, टोने-टोटके का असर नहीं रहता है. ____________(((((#Vnita)))))_______🔻🔺🔻🔺🔻 @everyone 🙏🙏❤️

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कौन कौन सी तकनीके हैं, जो केवल भारत के पास है? By वनिता कासनियां पंजाब द्वारा आज के प्रगतिशील देश तकनीक के माध्यम से एक दूसरे से इतने बेहतर तरीके से जुड़े हुये है, की ऐसा बहुत कम देखने मे आता है की किसी देश ने कोई तकनीक विकसित की और वो सिर्फ उस देश तक ही सीमित रह जाये। लंबी अवधि के व्यापक आर्थिक विकास के लिए नई तकनीक को अपनाना आवश्यक है। इसीलिए कोई भी विकसित देश नहीं चाहेगा कि तकनीके सिर्फ उसी के पास रहें। वो ज्यादा से ज्यादा इसे दूसरे देशो में फैलाकर इससे लाभ लेने के चक्कर मे रहता है। ऐसा सिर्फ सैन्य ताकतो के मामलो मे ही होता है जब कोई देश अपने देश की सुरक्षा के लिए ऐसी तकनीकों का निर्माण करे, जो और किसी के पास ना हो। और अपने देश भारत मे तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई तकनीक विकसित हुई हो, और उसे हमने छुपा कर रखा हो। इसका कारण दुनियाँ मे अपना सिक्का जमाना या पैसा कमाना नहीं है, बल्कि भारतीयों मे नरमदिली का होना है। पुरातन काल से ही भारतीय वैज्ञानिकों और अन्वेषणकर्ताओं ने अपने आविष्कारों, खोजो और नीतियों को मुफ्त मे पूरी दुनियाँ मे यूँ ही बाँटा है। सारे देश के वैज्ञानिक कहाँ अपने द्वारा की गयी खोजो को पेटेंट कराकर अधिक से अधिक लाभ लेने के चक्कर मे रहते है, और कहाँ अपने देश के लोग किसी खोज को बिना पेटेंट कराये पूरी दुनिया की भलाई के लिए इन तकनीकों का श्रेय भी नहीं लेते है। ऐसे कई उदाहरण है, जब भारतीयो के आविष्कार बिना किसी लाभ के पूरी दुनिया के काम आए। कुछ उदाहरण देता हूँ- ☞ आप सभी ने यूएसबी (usb) को तो देखा ही होगा। चार्जर, माऊस, कीबोर्ड से लेकर बड़े बड़े गैजेट्स मे इसकी कितनी उपयोगिता ही, ये शायद मुझे बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन एक बात मुझे बताने की जरूरत पड़े कि, क्या आप जानते है कि इसका आविष्कार एक भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर आर्किटेक्ट अजय भट्ट ने किया था। वे चाहते तो अपने इस काम को पेटेंट कराकर करोड़ो मे रुपये कमाते या फिर ये तकनीक सिर्फ भारतीय कंपनियो तक सीमित रखते, लेकिन उन्होने टीम वर्क का बहाना बनाकर इसे मुफ्त मे पूरी दुनिया को इस्तेमाल करने के लिए छोड़ दिया। आप खुद ही सोचिए की करीब 10 मिलियन यूएसबी इस वक़्त पूरी दुनिया मे आपरेशनल है। ☞ दूसरी बात हम योग पर आते है। भारत योग कला की तकनीक का व्यवसायीकरण करके सिर्फ इसे भारत में ही सीमित रखता? ☞ तीसरी बात हम शल्य चिकित्सा पर आते है। क्या होता अगर विश्व के प्रथम सर्जन सुश्रुत ने दुनियाभर से आए डाक्टरों के साथ ये तकनीक साझा करने से मना कर दिया होता। भारत मे सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है, जिनहोने विश्व में पहली बार प्लास्टिक सर्जरी, राइनोप्लास्टिक सर्जरी और कैटेरेक्ट सर्जरी की थी, वो भी बिना किसी आधुनिक मशीनों के कई सौ सालो पहले। फिर यूरोपियन और बाकी जगहो के चिकित्सको ने उनके पास इस तरीके को सीखने के लिए आना शुरू कर दिया। सुश्रुत ने कभी भी किसी को निराश नहीं किया। सोच कर ही देखिये की आज विश्व की मेडिकल साइन्स भारत से कितनी पीछे होती अगर इस तकनीक का सिर्फ भारत मे ही इस्तेमाल होता? आप बेहतर कल्पना कर सकते है। तो आप ये बात तो असंभव ही समझिए की कोई तकनीक सिर्फ भारत मे ही रह जाये। आप चाहे तो इस बात से मूल्यांकन कर सकते है कौन सी तकनीके सबसे पहले सिर्फ भारतीयो द्वारा विकसित की गयी थी। समय भी लगेगा और दिमाग भी खर्च होगा, तो चलिये शुरु से शुरू करते है और ऐसी ही कुछ खोजो के बारे मे विस्तार से जानते है जो सिर्फ भारत मे ही हुई है। ✦ ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile) इस मिसाइल का निर्माण भारत मे हुआ है और फिलहाल इसका उपयोग सिर्फ भारत मे ही है। ब्रह्मोस एक मध्यम दूरी की रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बी, जहाजों, विमानों या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ (भारतीय सरकारी संस्था) ने रूस के साथ मिलकर बनाया है। इस मिसाइल मे उपयोग होने वाली तकनीक का इस्तेमाल इस वक़्त सिर्फ भारत की ही सेनाओ द्वारा हो रहा है। ब्रह्मोस नाम दो नदियों, भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम से बना है।ब्रह्मोस मिसाइल की अधिकतम गति लगभग 3,450 किमी प्रति घंटे या 2,148 मील प्रति घंटे है। ✦ लिविंग रूट ब्रिज (Living Root Bridge) दुनिया भर में कई ऐसे पुल हैं जो इंसानों की बेहतरीन संरचनाओ मे से माने जाते हैं! लेकिन भारत के मेघालय में लिविंग रूट ब्रिज को कुदरत और इंसान की बेहतरीन जुगलबंदी का बेहतरीन नमूना माना जाता है। ये पुल ज़िंदा पेड़ की मोटी और उलझी हुई जड़ो से बनाए जाते है। वे रबर और अंजीर के पेड़ की जड़ों से हस्तनिर्मित हैं। जिस पेड़ से यह बनता है, जब तक वह स्वस्थ रहता है, पुल में जड़ें स्वाभाविक रूप से मोटी और मजबूत होती जाती हैं। बताइये आपने कहीं सुनी है पूरी दुनिया मे ऐसी तकनीक जिससे हम पेड़ो की जड़ो को जहां चाहे मोड़ सकते है। इसे बनाने की तकनीक काफी पुरानी है और ये सिर्फ भारत के प्रशिक्षित खासी और जयंतिया जनजातियों द्वारा ही बनाए जाते है। पर्यावरण के मामले मे ये भारत की एक और उपलब्धि है जिस पर भारत गर्व कर सकता है, और इस बात पर भी, कि ऐसा सिर्फ भारत में होता है। ✦ भारतीय मार्स ओर्बिटर आप में से अधिकतर को ये पता होगा की भारत मंगल पर ओर्बिटर भेजने वाला दुनिया का चौथा देश है। और अपने पहले ही प्रयास मे मंगल तक पहुँचने वाला दुनिया का एकमात्र देश है। ये ऐसी उपलब्धि है जिस पर पूरा भारत इसरो पर गर्व कर सकता है। तो आखिर कौन सी ऐसी खास तकनीक थी हमारे ओर्बिटर में ? दरअसल भारत के पास इतना ताकतवर रॉकेट नहीं था, जो ओर्बिटर को सीधे ही मंगल की कक्षा मे पहुँचा दे लेकिन भारत ने ऐसी तकनीक अपनाइ कि मार्स मिशन का बजट हॉलीवुड की कई फिल्मों से भी सस्ता हो गया। उनमे से कुछ मुख्य है; ओर्बिटर को सीधे मार्स कि कक्षा मे पहुंचाने के बजाय विभिन्न ग्रहो कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग ओर्बिटर को गति प्रदान करने के लिए किया गया। MOM के प्रोब ने पृथ्वी की कक्षा में लगभग एक महीने का समय बिताया, जहां 30 नवंबर 2013 को मंगल की कक्षा मे जाने के लिए आखिरी इंजेक्शन से पहले सात अपभू-उठाने वाले कक्षीय युद्धाभ्यासों को एक सीरीज मे लांच किया गया। मंगल ग्रह पर 298 दिनों के पारगमन के बाद, इसे 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित किया गया था। ओर्बिटर को हल्का बनाने के लिए उसके कई फ्रेमों मे भारत मे निर्मित स्टील से भी हल्के संरचनाओं (एल्यूमिनियम और CFRP- विशेष प्रकार का प्लास्टिक फ़ाइबर) का निर्माण किया गया था। और ऐसा पहली बार सिर्फ भारत मे ही किया गया था। इसे कहते है सही मायनों में आपदा में अवसर तलाशना। ये सब आविष्कार तो ऐसे है जिनके बारे मे अधिकतर जानते है। लेकिन कुछ तकनीकों के बारे में अभी तक खुद कई भारतीयों को ही नहीं पता है। ऐसे सैकड़ो उदाहरण आप भारत के प्राचीन मंदिरों मे देख सकते है। मैं सबके बारे में लिखने बैठ जाऊ तो कई दिन लग जाएँगे। विदेशी पुरातत्वविदों ने इन रचनाओं को कोरी सजावट का सामान ही बताया है। उनके अनुसार ये सब सिर्फ किसी धार्मिक अंधविश्वास पर ही बनाए गए थे। लेकिन हाल मे हुई कुछ खोजो के आधार पर ये पूरी तरह वैज्ञानिक है और भारत के सारे मंदिरो के एक भी मूर्ति बिना वजह नहीं है, और कोरे अंधविश्वास पर तो बिलकुल नहीं। भारत के प्राचीन लेखो मे आग लगाकर इन्हे सिर्फ अध्यात्म से ही जोड़ा गया है, जो काफी दुखद है। ये खोज दुनिया मे इतने प्रसिद्ध हुए ही नहीं, सिर्फ विश्व के कुछ कागजी रिकार्डों मे इनका नाम दर्ज़ कर हमें वैश्विक संस्थाओं द्वारा केवल लोलीपोप दिखाया गया है। गलती से भी ऐसे मंदिरों के बारे मे कुछ जानने के लिए विकिपीडिया जैसे साइटों पर आँख मूंदकर भरोसा मत कीजिएगा। इनके पास भी ऐसी कई भ्रामक जानकारियाँ है इन मंदिरों के लिए। भारतीय सरकार और पुरातत्वविदों से कुछ उम्मीद ही करना बेकार है। मीडिया जैसे जागरूकता फैलाने वाले संस्थान तो बॉलीवुड मसाला, राजनीति की गरमागरम बहस और सांप्रदायिक मुद्दो से टीआरपी बनाने मे इतने व्यस्त है की वे भी इसे तभी दिखते है जब इनके पास न्यूज़ की कमी हो। एक कारण यह भी हो सकता है की हमारे पास इन खोजो के बारे मे रिसर्च करने से भी बड़ी समस्याएँ है, जिससे ये मुद्दे कहीं कोने मे दब से जाते है। आप सोच भी नहीं सकते की यदि ऐसी अद्भुत तकनीके किसी और विकसित देश मे होती तो वो अब तक इनको कितने बड़े रिसर्च सेंटर और पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित कर देता! ऐसे ही कुछ मंदिरो और इनमे इस्तेमाल हुये खास तकनीकों के बारे में हम यहाँ जानेंगे जो विश्व मे और कहीं नहीं पाये जाते है, और इनको बनाने की तकनीक की खोज अभी बाकी है। ✦ पत्थरो मे संगीत 🎶 भारत में संगीत का इतिहास काफी पुराना रहा है। वाद्ययंत्रों में और संगीत में जो कला भारतीयों ने हासिल की है, वो बेजोड़ है। कुछ दक्षिण-भारतीय मंदिरों में तो ऐसे पत्थर के खंभो का निर्माण किया गया है जो संगीत के अलग अलग त्वरण वाली ध्वनियाँ उत्पन्न करते है। आइये, आपको इसी विशेषता वाले कुछ मंदिरों की सैर कराता हूँ। ✧हम्पी हम्पी भारत में एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है। यह कर्नाटक में स्थित है, जो भारत का एक दक्षिण-पश्चिमी प्रांत है। यह राज्य की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 350 किमी उत्तर में स्थित है। हम्पी के खंडहर, जैसा कि आज भी जाना जाता है, इतिहास, वास्तुकला और धर्म का एक विशाल संग्रहालय है। यह 25 वर्ग किमी से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ मंदिरों, महलों, बाजार की सड़कों, किलेबंदी, जलीय संरचनाओं और प्राचीन स्मारकों की बहुतायत है। हम्पी में विजया विट्ठल मंदिर में 56 संगीत स्तंभ हैं जिन्हें सारेगामा स्तंभ भी कहा जाता है। सा, रे, गा, मा, सात संगीत नोटों में से चार हैं। अंगूठे से टकराने पर ये स्तंभ संगीतमय स्वर उत्पन्न करते हैं। ऐसा लगता है जैसे घंटी बज रही हो। इन स्तंभों के भूवैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि चट्टानें न केवल धात्विक अयस्क की उपस्थिति के कारण बल्कि बड़ी मात्रा में सिलिका के कारण भी इस तरह गुंजयमान हैं। ✧ श्री विजया विट्ठल मंदिर संगीत के स्तंभों को हिंदू कला की अनूठी स्थापत्य कलाओं में से एक माना जाता है। मूर्तिकारों ने अपने मूर्तिकला के साथ-साथ संगीत कौशल का भी उनमें निवेश किया है। श्री विजया विट्ठल मंदिर १५वीं शताब्दी में बनाया गया था जिसमें ५६ संगीत स्तंभ हैं। ✧ नेल्लईअप्पर मंदिर तिरुनेलवेली के नेल्लईअप्पर मंदिर में, 4 संगीत स्तंभ हैं। उनके पास एक केंद्रीय स्तंभ है जिसके चारों ओर अलग-अलग चौड़ाई के 48 छोटे बेलनाकार स्तंभ हैं। जब उन्हें किसी चीज़ से टैप किया जाता है तो वे अलग-अलग आवाजें देते हैं। आप लोगो में से कई लोग अलग अलग देशों मे जा चुके होंगे और वहाँ की कई प्रसिद्ध चीज़ों को भी देखा होगा, लेकिन ऐसे विशाल पत्थर के खंभो मे कभी संगीत के सुरों का समागम देखा है? ये तकनीक यकीनन सिर्फ भारतीयो के पास ही थी। यहीं नहीं, कई मंदिरो मे पत्थरों की चैन भी बनाई गयी है, जो आज की तकनीक के हिसाब से बिना पत्थरो के पिघलाए नामुमकिन है। कई मंदिरों के गहन विश्लेषण और स्थानीय लेखो को पढ़ने के बाद ये साबित हो चुका है कि सिर्फ भारतीयों के पास ही इस तरह के प्त्थरो को पिघलाने कि तकनीक थी। इतिहास मे और गहराई तक जाएंगे तो और भी कई ऐसे आविष्कार और है जिनकी उत्पत्ति और उत्पादन यदि भारत तक ही सीमित होती तो निश्चय ही दुनिया थोड़ी कम विकसित होती। वनिता कासनियां पंजाब 🌹🙏🙏🌹 आशा करती हूँ की आप सभी को ये प्रयास पसंद आया होगा। लेख लिखने में समय तो लगा पर कुछ शिक्षाप्रद लिख कर अच्छा लग रहा है। इतने लंबे लेख को पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद! माना, की अपने भारत मे समस्याए थोड़ी ज्यादा है, लेकिन आश्चर्य और गर्व करने लायक बातें तो उससे भी ज्यादा है। जैसा भी है, हमारा देश हमें बहुत प्यारा है... जय हिन्द, जय भारत !

   कौन कौन सी तकनीके हैं, जो केवल भारत के पास है?

By वनिता कासनियां पंजाब द्वारा

आज के प्रगतिशील देश तकनीक के माध्यम से एक दूसरे से इतने बेहतर तरीके से जुड़े हुये है, की ऐसा बहुत कम देखने मे आता है की किसी देश ने कोई तकनीक विकसित की और वो सिर्फ उस देश तक ही सीमित रह जाये।

लंबी अवधि के व्यापक आर्थिक विकास के लिए नई तकनीक को अपनाना आवश्यक है। इसीलिए कोई भी विकसित देश नहीं चाहेगा कि तकनीके सिर्फ उसी के पास रहें। वो ज्यादा से ज्यादा इसे दूसरे देशो में फैलाकर इससे लाभ लेने के चक्कर मे रहता है।

ऐसा सिर्फ सैन्य ताकतो के मामलो मे ही होता है जब कोई देश अपने देश की सुरक्षा के लिए ऐसी तकनीकों का निर्माण करे, जो और किसी के पास ना हो। और अपने देश भारत मे तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई तकनीक विकसित हुई हो, और उसे हमने छुपा कर रखा हो। इसका कारण दुनियाँ मे अपना सिक्का जमाना या पैसा कमाना नहीं है, बल्कि भारतीयों मे नरमदिली का होना है।

पुरातन काल से ही भारतीय वैज्ञानिकों और अन्वेषणकर्ताओं ने अपने आविष्कारों, खोजो और नीतियों को मुफ्त मे पूरी दुनियाँ मे यूँ ही बाँटा है

सारे देश के वैज्ञानिक कहाँ अपने द्वारा की गयी खोजो को पेटेंट कराकर अधिक से अधिक लाभ लेने के चक्कर मे रहते है, और कहाँ अपने देश के लोग किसी खोज को बिना पेटेंट कराये पूरी दुनिया की भलाई के लिए इन तकनीकों का श्रेय भी नहीं लेते है। ऐसे कई उदाहरण है, जब भारतीयो के आविष्कार बिना किसी लाभ के पूरी दुनिया के काम आए।

कुछ उदाहरण देता हूँ-

☞ आप सभी ने यूएसबी (usb) को तो देखा ही होगा। चार्जर, माऊस, कीबोर्ड से लेकर बड़े बड़े गैजेट्स मे इसकी कितनी उपयोगिता ही, ये शायद मुझे बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन एक बात मुझे बताने की जरूरत पड़े कि, क्या आप जानते है कि इसका आविष्कार एक भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर आर्किटेक्ट अजय भट्ट ने किया था।

वे चाहते तो अपने इस काम को पेटेंट कराकर करोड़ो मे रुपये कमाते या फिर ये तकनीक सिर्फ भारतीय कंपनियो तक सीमित रखते, लेकिन उन्होने टीम वर्क का बहाना बनाकर इसे मुफ्त मे पूरी दुनिया को इस्तेमाल करने के लिए छोड़ दिया।

आप खुद ही सोचिए की करीब 10 मिलियन यूएसबी इस वक़्त पूरी दुनिया मे आपरेशनल है।

☞ दूसरी बात हम योग पर आते है। भारत योग कला की तकनीक का व्यवसायीकरण करके सिर्फ इसे भारत में ही सीमित रखता?

☞ तीसरी बात हम शल्य चिकित्सा पर आते है। क्या होता अगर विश्व के प्रथम सर्जन सुश्रुत ने दुनियाभर से आए डाक्टरों के साथ ये तकनीक साझा करने से मना कर दिया होता। भारत मे सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है, जिनहोने विश्व में पहली बार प्लास्टिक सर्जरी, राइनोप्लास्टिक सर्जरी और कैटेरेक्ट सर्जरी की थी, वो भी बिना किसी आधुनिक मशीनों के कई सौ सालो पहले। फिर यूरोपियन और बाकी जगहो के चिकित्सको ने उनके पास इस तरीके को सीखने के लिए आना शुरू कर दिया।

सुश्रुत ने कभी भी किसी को निराश नहीं किया।

सोच कर ही देखिये की आज विश्व की मेडिकल साइन्स भारत से कितनी पीछे होती अगर इस तकनीक का सिर्फ भारत मे ही इस्तेमाल होता? आप बेहतर कल्पना कर सकते है।

तो आप ये बात तो असंभव ही समझिए की कोई तकनीक सिर्फ भारत मे ही रह जाये।

आप चाहे तो इस बात से मूल्यांकन कर सकते है कौन सी तकनीके सबसे पहले सिर्फ भारतीयो द्वारा विकसित की गयी थी। समय भी लगेगा और दिमाग भी खर्च होगा, तो चलिये शुरु से शुरू करते है और ऐसी ही कुछ खोजो के बारे मे विस्तार से जानते है जो सिर्फ भारत मे ही हुई है।

✦ ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile)

इस मिसाइल का निर्माण भारत मे हुआ है और फिलहाल इसका उपयोग सिर्फ भारत मे ही है।

ब्रह्मोस एक मध्यम दूरी की रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे पनडुब्बी, जहाजों, विमानों या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ (भारतीय सरकारी संस्था) ने रूस के साथ मिलकर बनाया है। इस मिसाइल मे उपयोग होने वाली तकनीक का इस्तेमाल इस वक़्त सिर्फ भारत की ही सेनाओ द्वारा हो रहा है।

ब्रह्मोस नाम दो नदियों, भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम से बना है।ब्रह्मोस मिसाइल की अधिकतम गति लगभग 3,450 किमी प्रति घंटे या 2,148 मील प्रति घंटे है।

✦ लिविंग रूट ब्रिज (Living Root Bridge)

दुनिया भर में कई ऐसे पुल हैं जो इंसानों की बेहतरीन संरचनाओ मे से माने जाते हैं! लेकिन भारत के मेघालय में लिविंग रूट ब्रिज को कुदरत और इंसान की बेहतरीन जुगलबंदी का बेहतरीन नमूना माना जाता है। ये पुल ज़िंदा पेड़ की मोटी और उलझी हुई जड़ो से बनाए जाते है। वे रबर और अंजीर के पेड़ की जड़ों से हस्तनिर्मित हैं। जिस पेड़ से यह बनता है, जब तक वह स्वस्थ रहता है, पुल में जड़ें स्वाभाविक रूप से मोटी और मजबूत होती जाती हैं।

बताइये आपने कहीं सुनी है पूरी दुनिया मे ऐसी तकनीक जिससे हम पेड़ो की जड़ो को जहां चाहे मोड़ सकते है।

इसे बनाने की तकनीक काफी पुरानी है और ये सिर्फ भारत के प्रशिक्षित खासी और जयंतिया जनजातियों द्वारा ही बनाए जाते है। पर्यावरण के मामले मे ये भारत की एक और उपलब्धि है जिस पर भारत गर्व कर सकता है, और इस बात पर भी, कि ऐसा सिर्फ भारत में होता है।

✦ भारतीय मार्स ओर्बिटर

आप में से अधिकतर को ये पता होगा की भारत मंगल पर ओर्बिटर भेजने वाला दुनिया का चौथा देश है। और अपने पहले ही प्रयास मे मंगल तक पहुँचने वाला दुनिया का एकमात्र देश है। ये ऐसी उपलब्धि है जिस पर पूरा भारत इसरो पर गर्व कर सकता है। तो आखिर कौन सी ऐसी खास तकनीक थी हमारे ओर्बिटर में ?

दरअसल भारत के पास इतना ताकतवर रॉकेट नहीं था, जो ओर्बिटर को सीधे ही मंगल की कक्षा मे पहुँचा दे लेकिन भारत ने ऐसी तकनीक अपनाइ कि मार्स मिशन का बजट हॉलीवुड की कई फिल्मों से भी सस्ता हो गया। उनमे से कुछ मुख्य है;

ओर्बिटर को सीधे मार्स कि कक्षा मे पहुंचाने के बजाय विभिन्न ग्रहो कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग ओर्बिटर को गति प्रदान करने के लिए किया गया। MOM के प्रोब ने पृथ्वी की कक्षा में लगभग एक महीने का समय बिताया, जहां 30 नवंबर 2013 को मंगल की कक्षा मे जाने के लिए आखिरी इंजेक्शन से पहले सात अपभू-उठाने वाले कक्षीय युद्धाभ्यासों को एक सीरीज मे लांच किया गया। मंगल ग्रह पर 298 दिनों के पारगमन के बाद, इसे 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित किया गया था।

ओर्बिटर को हल्का बनाने के लिए उसके कई फ्रेमों मे भारत मे निर्मित स्टील से भी हल्के संरचनाओं (एल्यूमिनियम और CFRP- विशेष प्रकार का प्लास्टिक फ़ाइबर) का निर्माण किया गया था। और ऐसा पहली बार सिर्फ भारत मे ही किया गया था।

इसे कहते है सही मायनों में आपदा में अवसर तलाशना।

ये सब आविष्कार तो ऐसे है जिनके बारे मे अधिकतर जानते है। लेकिन कुछ तकनीकों के बारे में अभी तक खुद कई भारतीयों को ही नहीं पता है। ऐसे सैकड़ो उदाहरण आप भारत के प्राचीन मंदिरों मे देख सकते है। मैं सबके बारे में लिखने बैठ जाऊ तो कई दिन लग जाएँगे।

विदेशी पुरातत्वविदों ने इन रचनाओं को कोरी सजावट का सामान ही बताया है। उनके अनुसार ये सब सिर्फ किसी धार्मिक अंधविश्वास पर ही बनाए गए थे। लेकिन हाल मे हुई कुछ खोजो के आधार पर ये पूरी तरह वैज्ञानिक है और भारत के सारे मंदिरो के एक भी मूर्ति बिना वजह नहीं है, और कोरे अंधविश्वास पर तो बिलकुल नहीं।

भारत के प्राचीन लेखो मे आग लगाकर इन्हे सिर्फ अध्यात्म से ही जोड़ा गया है, जो काफी दुखद है।

ये खोज दुनिया मे इतने प्रसिद्ध हुए ही नहीं, सिर्फ विश्व के कुछ कागजी रिकार्डों मे इनका नाम दर्ज़ कर हमें वैश्विक संस्थाओं द्वारा केवल लोलीपोप दिखाया गया है। गलती से भी ऐसे मंदिरों के बारे मे कुछ जानने के लिए विकिपीडिया जैसे साइटों पर आँख मूंदकर भरोसा मत कीजिएगा। इनके पास भी ऐसी कई भ्रामक जानकारियाँ है इन मंदिरों के लिए।

भारतीय सरकार और पुरातत्वविदों से कुछ उम्मीद ही करना बेकार है। मीडिया जैसे जागरूकता फैलाने वाले संस्थान तो बॉलीवुड मसाला, राजनीति की गरमागरम बहस और सांप्रदायिक मुद्दो से टीआरपी बनाने मे इतने व्यस्त है की वे भी इसे तभी दिखते है जब इनके पास न्यूज़ की कमी हो।

एक कारण यह भी हो सकता है की हमारे पास इन खोजो के बारे मे रिसर्च करने से भी बड़ी समस्याएँ है, जिससे ये मुद्दे कहीं कोने मे दब से जाते है। आप सोच भी नहीं सकते की यदि ऐसी अद्भुत तकनीके किसी और विकसित देश मे होती तो वो अब तक इनको कितने बड़े रिसर्च सेंटर और पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित कर देता!

ऐसे ही कुछ मंदिरो और इनमे इस्तेमाल हुये खास तकनीकों के बारे में हम यहाँ जानेंगे जो विश्व मे और कहीं नहीं पाये जाते है, और इनको बनाने की तकनीक की खोज अभी बाकी है।

✦ पत्थरो मे संगीत 🎶

भारत में संगीत का इतिहास काफी पुराना रहा है। वाद्ययंत्रों में और संगीत में जो कला भारतीयों ने हासिल की है, वो बेजोड़ है। कुछ दक्षिण-भारतीय मंदिरों में तो ऐसे पत्थर के खंभो का निर्माण किया गया है जो संगीत के अलग अलग त्वरण वाली ध्वनियाँ उत्पन्न करते है।

आइये, आपको इसी विशेषता वाले कुछ मंदिरों की सैर कराता हूँ।

✧हम्पी

हम्पी भारत में एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है। यह कर्नाटक में स्थित है, जो भारत का एक दक्षिण-पश्चिमी प्रांत है। यह राज्य की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 350 किमी उत्तर में स्थित है। हम्पी के खंडहर, जैसा कि आज भी जाना जाता है, इतिहास, वास्तुकला और धर्म का एक विशाल संग्रहालय है। यह 25 वर्ग किमी से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ मंदिरों, महलों, बाजार की सड़कों, किलेबंदी, जलीय संरचनाओं और प्राचीन स्मारकों की बहुतायत है।

हम्पी में विजया विट्ठल मंदिर में 56 संगीत स्तंभ हैं जिन्हें सारेगामा स्तंभ भी कहा जाता है। सा, रे, गा, मा, सात संगीत नोटों में से चार हैं। अंगूठे से टकराने पर ये स्तंभ संगीतमय स्वर उत्पन्न करते हैं। ऐसा लगता है जैसे घंटी बज रही हो। इन स्तंभों के भूवैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि चट्टानें न केवल धात्विक अयस्क की उपस्थिति के कारण बल्कि बड़ी मात्रा में सिलिका के कारण भी इस तरह गुंजयमान हैं।

✧ श्री विजया विट्ठल मंदिर

संगीत के स्तंभों को हिंदू कला की अनूठी स्थापत्य कलाओं में से एक माना जाता है। मूर्तिकारों ने अपने मूर्तिकला के साथ-साथ संगीत कौशल का भी उनमें निवेश किया है। श्री विजया विट्ठल मंदिर १५वीं शताब्दी में बनाया गया था जिसमें ५६ संगीत स्तंभ हैं।

✧ नेल्लईअप्पर मंदिर

तिरुनेलवेली के नेल्लईअप्पर मंदिर में, 4 संगीत स्तंभ हैं। उनके पास एक केंद्रीय स्तंभ है जिसके चारों ओर अलग-अलग चौड़ाई के 48 छोटे बेलनाकार स्तंभ हैं। जब उन्हें किसी चीज़ से टैप किया जाता है तो वे अलग-अलग आवाजें देते हैं।

आप लोगो में से कई लोग अलग अलग देशों मे जा चुके होंगे और वहाँ की कई प्रसिद्ध चीज़ों को भी देखा होगा, लेकिन ऐसे विशाल पत्थर के खंभो मे कभी संगीत के सुरों का समागम देखा है? ये तकनीक यकीनन सिर्फ भारतीयो के पास ही थी।

यहीं नहीं, कई मंदिरो मे पत्थरों की चैन भी बनाई गयी है, जो आज की तकनीक के हिसाब से बिना पत्थरो के पिघलाए नामुमकिन है। कई मंदिरों के गहन विश्लेषण और स्थानीय लेखो को पढ़ने के बाद ये साबित हो चुका है कि सिर्फ भारतीयों के पास ही इस तरह के प्त्थरो को पिघलाने कि तकनीक थी।

इतिहास मे और गहराई तक जाएंगे तो और भी कई ऐसे आविष्कार और है जिनकी उत्पत्ति और उत्पादन यदि भारत तक ही सीमित होती तो निश्चय ही दुनिया थोड़ी कम विकसित होती।


वनिता कासनियां पंजाब 🌹🙏🙏🌹

आशा करती हूँ की आप सभी को ये प्रयास पसंद आया होगा। लेख लिखने में समय तो लगा पर कुछ शिक्षाप्रद लिख कर अच्छा लग रहा है। इतने लंबे लेख को पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद!

माना, की अपने भारत मे समस्याए थोड़ी ज्यादा है, लेकिन आश्चर्य और गर्व करने लायक बातें तो उससे भी ज्यादा है। जैसा भी है, हमारा देश हमें बहुत प्यारा है...

जय हिन्द, जय भारत !


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आम आदमी पार्टी By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबभारत का एक प्रमुख राजनैतिक दलकिसी अन्य भाषा में पढ़ेंडाउनलोड करेंध्यान रखेंसंपादित करेंआम आदमी पार्टी, संक्षेप में आप, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल एवं अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय राजनीतिक दल है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा २६ नवम्बर २०१२ को भारतीय संविधान अधिनियम की ६३ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी।आम आदमी पार्टीLogo_of_AAP_2019.pngनेता अरविंद केजरीवालगठन २६ नवम्बर २०१२मुख्यालय भूतल, ए-११९, कौशाम्बी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत)), ग़ाज़ियाबाद- २०१०१०लोकसभा मे सीटों की संख्या 1 / 543राज्यसभा मे सीटों की संख्या 3 / 245राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या 62 / 70दिल्ली विधानसभा19 / 117पंजाब विधानसभाविचारधारा स्वराजविद्यार्थी शाखा छात्र युवा संघर्ष समितिजालस्थल www.aamaadmiparty.orgElection symbolभारत की राजनीतिराजनैतिक दलचुनावसन् २०११ में इंडिया अगेंस्ट करप्शन नामक संगठन ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए जन लोकपाल आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा जनहित की उपेक्षा के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी पहली बार दिसम्बर २०१३ में दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरी।पार्टी ने चुनाव में २८ सीटों पर जीत दर्ज की और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल ने २८ दिसम्बर २०१३ को दिल्ली के ७वें मुख्य मन्त्री पद की शपथ ली। ४९ दिनों के बाद १४ फ़रवरी २०१४ को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया।इतिहाससंपादित करेंआम आदमी पार्टी की उत्पत्ति सन् 2012 में इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा अन्ना हजारे के नेतृत्व में चलाये गये जन लोकपाल आन्दोलन के समापन के दौरान हुई। जन लोकपाल बनाने के प्रति भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शित उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण राजनीतिक विकल्प की तलाश की जाने लगी थी। अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आन्दोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे जबकि अरविन्द केजरीवाल आन्दोलन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये एक अलग पार्टी बनाकर चुनाव में शामिल होने के पक्षधर थे। उनके विचार से वार्ता के जरिये जन लोकपाल विधेयक बनवाने की कोशिशें व्यर्थ जा रहीं थीं। इण्डिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा सामाजिक जुड़ाव सेवाओं पर किये गये सर्वे में राजनीति में शामिल होने के विचार को व्यापक समर्थन मिला।१९ सितम्बर २०१२ को अन्ना और अरविन्द इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि उनके राजनीति में शामिल होने सम्बन्धी मतभेदों का दूर होना मुश्किल है। इसलिये उन्होंने समान लक्ष्यों के बावजूद अपना रास्ता अलग करने का निश्चय किया। जन लोकपाल आन्दोलन से जुड़े मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण व योगेन्द्र यादव आदि ने अरविन्द केजरीवाल का साथ दिया, जबकि किरण वेदी व सन्तोष हेगड़े आदि कुछ अन्य लोगों ने हजारे से सहमति प्रकट की। केजरीवाल ने २ अक्टूबर २०१२ को राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। इस प्रकार भारतीय संविधान की वर्षगांठ के दिन २६ नवम्वर (२०१२) को औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी का गठन हुआ।[1][2]विचारधारासंपादित करेंपार्टी कहती है कि वह किसी विशेष विचारधारा द्वारा निर्देशित नहीं हैं। उन्होंने व्यवस्था को बदलने के लिये राजनीति में प्रवेश किया है। अरविन्द केजरीवाल के शब्दों में - "हम आम आदमी हैं। अगर वामपंथी विचारधारा में हमारे समाधान मिल जायें तो हम वहाँ से विचार उधार ले लेंगे और अगर दक्षिणपंथी विचारधारा में हमारे समाधान मिल जायें तो हम वहाँ से भी विचार उधार लेने में खुश हैं।नेतृत्वसंपादित करेंनेता पदअरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्यमंत्री, दिल्लीमनीष सिसोदिया उपमुख्यमंत्री, दिल्लीसंजय सिंह राज्यसभा सांसदहरपाल सिंह चीमा नेता प्रतिपक्ष, पंजाब विधानसभामुख्यमंत्रीसंपादित करेंमुख्य लेख: दिल्ली के मुख्यमंत्रियों की सूचीक्रम राज्य मुख्यमंत्री कार्यकाल पदावधि विधानसभा१ दिल्ली अरविंद केजरीवाल २८ दिसंबर २०१३ १४ फरवरी २०१४ ४९ दिन पांचवी२ १४ फरवरी २०१५ १५ फरवरी २०२० ५ वर्ष १ दिन छठवीं३ १६ फरवरी २०२० पदस्थ 1 वर्ष, 79 दिन सातवींराज्यसभासंपादित करेंक्रम राज्य सांसद नियुक्ति तिथि निवृत्ति तिथि१ दिल्ली संजय सिंह २८ जनवरी २०१८ २७ जनवरी २०२४२ नारायण दास गुप्ता २८ जनवरी २०१८ २७ जनवरी २०२४३ सुशील कुमार गुप्ता २८ जनवरी २०१८ २७ जनवरी २०२४चुनावी भागीदारीसंपादित करेंलोकसभासंपादित करेंलोकसभा चुनाव वर्ष सीटें लड़ी सीटें जीतीं प्राप्त मत मत % लड़ी सीटों पर मत % राज्य (सीटें) संदर्भसोलहवीं लोकसभा २०१४ ४ पंजाब (४)सत्रहवीं लोकसभा २०१९ ३६ १ पंजाब (१)दिल्ली विधानसभा चुनाव २०१३संपादित करेंमुख्य लेख: दिल्ली राज्य विधानसभा चुनाव, २०१३४ दिसम्बर २०१३ को हुए दिल्ली राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पहला चुनाव लड़ा। उसने पूरी दिल्ली के लिये चुनावी घोषणापत्र तैयार करने के साथ ही प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिये अलग-अलग घोषणापत्र तैयार किया।[3]दिल्ली चुनाव के पहले पार्टी को कई विवादों का सामना करना पड़ा। भारत सरकार के गृहमन्त्री, सुशील कुमार शिंदे ने पार्टी के विदेशी दान की जाँच कराने की बात कही। पार्टी ने दान राशि का सम्पूर्ण ब्यौरा पार्टी वेवसाइट पर पहले से ही सार्वजनिक होने की बात कही और अन्य राजनीतिक दलों को भी अपने चन्दे को सार्वजनिक करने की चुनौती दी।दिल्ली विधान सभा चुनाव के कुछ पहले एक मीडिया पोर्टल द्वारा आम आदमी के विधायक पद के उम्मीदवारों का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया जिसमें उन पर ग़ैर-ईमानदार होने के आरोप लगाये गये। आम आदमी पार्टी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर स्टिंग वीडियो में कई महत्वपूर्ण भागों को काट-छाँट कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया और मीडिया पोर्टल के खिलाफ मानहानि की याचिका दायर की।६ दिसम्बर को घोषित हुए परिणाम में ७० सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में पार्टी २८ सीटों पर विजयी रही। ३२ विधान सभा क्षेत्रों की विजेता भारतीय जनता पार्टी के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। अरविन्द केजरीवाल ने सत्तारूढ़ी कांग्रेस पार्टी की निवर्तमान मुख्यमन्त्री शीला दीक्षित (कांग्रेस) को लगभग 25,000 वोटों से पराजित किया।[4] और कांग्रेस केवल ८ सीटों पर सिमट गयी।[5][6][7]दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने भाजपा द्वारा सरकार बनाने से मना करने के बाद आम आदमी पार्टी विधायक दल के नेता अरविन्द केजरीवाल को सरकार बनाने के लिये आमन्त्रित किया। २८ दिसम्बर को कांग्रेस के समर्थन से पार्टी ने दिल्ली में अपनी सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।[8]लोकसभा चुनाव २०१४संपादित करेंक्रम राज्य निर्वाचन क्षेत्र निर्वाचित सांसद टीप१ पंजाब फतेहगढ़ साहिब हरिंदर सिंह खालसा २ फरीदकोट साधु सिंह ३ संगरूर भगवंत मान ४ पटियाला धर्मवीर गांधी पार्टी ने कहा था कि 2014 भारतीय आम चुनाव में 300 सीटों पर चुनाव लड़ने का इरादा रखती है। 432 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर चुकी पार्टी[9] की नज़र मुख्यतः हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित शहरी क्षेत्रों में थी, जहाँ पार्टी का समर्थन मुख्य रूप से आधारित है[10]आशा के विपरीत पार्टी का प्रदर्शन फीका रहा तथा पार्टी के सभी प्रमुख नेता चुनाव हार गए। लेकिन एक सुखद आश्चर्य के रूप में पार्टी ने पंजाब में चार सीटों- पटियाला, संगरूर, फरीदकोट तथा फतेहगढ़ साहिब में विजय प्राप्त की।[11][12]लोकसभा चुनाव २०१९संपादित करेंमुख्य लेख: भारतीय आम चुनाव, 2019 और लोकसभा चुनाव २०१९ में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों की सूचीक्रम राज्य निर्वाचन क्षेत्र निर्वाचित सांसद टीप१ पंजाब संगरूर भगवंत मान द्वितीय कार्यकालदिल्ली सरकारसंपादित करेंदिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के आमंत्रण पर दिल्ली के मतदाताओं से राय लेकर २८ दिसम्बर २०१३ को अरविंद केजरीवाल ने ७ मंत्रियों के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।[13] विश्वास मत प्रस्ताव पर कांग्रेस ने इस सरकार का समर्थन किया। सरकार बनाते ही पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र के वादे पूरे करने शुरु किए। विशेष सुरक्षा और लाल बत्ती वाली गाड़ी लेने से मना किया। ३१ दिसम्बर को बिजली की कीमतों में अप्रैल तक आधे की छूट देने की घोषणा की। बिजली कंपनियों का सीएजी ऑडिट कराने की व्यवस्था की। बीस किलोलीटर पानी मुप्त देने की घोषणा की। इस सरकार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से अनेक मामलों पर अवरोध का सामना करना पड़ा। बलात्कार एवं अन्य अपराध की घटनाओं पर पुलिस के कुछ अधिकारियों का तबादला करने के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय जाकर धरना देने की कोशिश की। इसमें अड़चने डालने पर रेल भवन के पास सड़क से ही केजरीवाल सरकार धरने पर बैठ गई। बाद में उपराज्यपाल के द्वारा पुलिस अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने के बाद सरकार वापस काम पर लौटी। खिड़की एक्सटेंसन में कानून मंत्री सोमनाथ भारती की भूमिका भी विवादित रही। फरवरी में अरविन्द केजरीवाल ने अपने निगरानी विभाग को प्राकृतिक गैस का दाम अनियमित रूप से बढ़ाने के लिए मुकेश अंबानी और एम॰ वीरप्पा मोइली सहित कई प्रभावी लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया।[14] केजरीवाल सरकार ने १३ फ़रवरी से विधान सभा सत्र बुलाकर जनलोकपाल और स्वराज्य विधेयक पारित करने की घोषणा की। जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने को लेकर उनका गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल से टकराव की स्थिति पैदा हो गई। लेफ्टिनेंट राज्यपाल नजीब जंग इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी को जरूरी बताते रहे जबकि केजरीवाल सरकार विधान सभा के विधेयक पास करने के संवैधानिक अधिकार पर डटी रही। १३ जनवरी के हंगामेदार सत्र के बाद १४ फ़रवरी के सत्र में राज्यपाल ने विधेयक को असंवैधानिक बताने का संदेश विधानसभा अध्यक्ष को भेजा और विधेयक पेश करने से पहले िस संदेश को सूचित करने को लिखा। इस संदेश के बाद कांग्रेस औ्रर भाजपा विधायकों ने विधेयक प्रस्तुत करने का मिलकर विरोध किया। जन लोकपाल पास करना तो दूर उसे प्रस्तुत भी न हो पाने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने १४ फ़रवरी को अपनी सरकार से इस्तीफा दे दिया। इस कारण दिल्ली में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा।[15]उल्लेखनीय कार्यसंपादित करेंआम आदमी पार्टी ने सत्ता में आते ही अपने सबसे बड़े वादों को निभाते हुए भ्रष्टाचार पर पर लगाम लगाई. दिल्ली में सभी विभागों से भ्रष्टाचार लगभग 80 फीसदी तक कम हुआ. 50 भ्रष्ट अधिकारी जेल भेजे गए. बिजली के दाम 50 फीसदी घटाए गए जबकि पानी 20,000 लीटर तक मुफ्त किया गया. प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट कोटा ख़त्म किया. सभी सरकारी अस्पतालों में सभी दवाई मुफ्त. तीन पुलों में 350 करोड़ बचाए। २०१६ के अगस्त में पक्षाध्यक्ष श्रीकेजरीवाल ने पोर्न-काण्ड में फसे मन्त्री सन्दीप कुमार को मन्त्रिपद से हटाया। सन्दीप कुमार पर आरोप था कि वो पोर्न के क्षेत्र में सक्रिय थे। अतः उनको ३०/८/२०१६ को मन्त्रिपद से हटाया गया [16] [17]।विवाद एवं आलोचनासंपादित करेंदिल्ली के दो आम आदमी पार्टी (आप) विधायकों , दिल्ली के कर्नल देविंदर सहारवत और असिम अहमद ने ,राजधानी में केजरीवाल सरकार पर खराब प्रशासन का आरोप लगाया और पार्टी के बड़े दावे में फसने से बचने की पंजाब के लोगों को चेतावनी दी।[18]सार्वजनिक परिवहन में सुधार: आम आदमी पार्टी (आप) ने सार्वजनिक परिवहन में काफी सुधार करने का वादा किया था लेकिन केजरीवाल का वितरण डीटीसी के मौजूदा बेड़े में एक भी बस नहीं जोड़ सकी। अंतिम मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के वादे को पूरा करने की कोई प्रगति नहीं हुई थी सार्वजनिक क्षेत्रों में वाई-फाई: यह एक ऐसा वादा था जो दिल्ली के लोगों को सबसे अधिक आकर्षित कर रहा था। "हम दिल्ली में पूरी तरह से वाई-फाई उपलब्ध कराएंगे ... वाई-फाई दिल्ली के सार्वजनिक क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाएगी। इंटरनेट और दूरसंचार कंपनियों से संपर्क किया गया है और उनके साथ परामर्श करके एक उच्च स्तरीय व्यवहार्यता अध्ययन किया गया है। " लेकिन दो साल बाद भी, राष्ट्रीय राजधानी अब भी नि: शुल्क वाई-फाई सेवाओं का इंतजार कर रही है। दिल्ली भर में 10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए: यह एक और वादा था, जो आम आदमी पार्टी पूरी करने में नाकाम रही। एएपी के दिल्ली इकाई के संयोजक दिलीप पांडे ने कहा था, राष्ट्रीय राजधानी विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी प्राप्त करेगी, लेकिन दिल्लीवासियों को अभी भी इसके कार्यान्वयन के लिए इंतजार कर रहा है।[19]बाल वनिता महिला आश्रमइन्हें भी देखेंसंपादित करेंभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसभ्रष्टाचार (आचरण)सन्दर्भसंपादित करें↑ 'आम आदमी पार्टी' के राष्ट्रीय संयोजक बने केजरीवाल, नवभारत टाइम्स, २६ नवम्बर २०१२, मूल से 29 नवंबर 2012 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि ११ दिसम्बर २०१३↑ "बीबीसी हिंदी - केजरीवाल ने लांच की आम आदमी पार्टी". मूल से 29 जनवरी 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 दिसंबर 2013.↑ "आम आदमी पार्टी 71 घोषणापत्र बनाएगी". जागरण. 22 सितम्बर 2013. मूल से 12 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 नवंबर 2013. नामालूम प्राचल |accesdate= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद)↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 15 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 दिसंबर 2013.↑ "'आप' की नहीं, आम आदमी की जीत". ज़ी न्यूज़. ८ दिसम्बर २०१३. मूल से 11 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 दिसंबर 2013.नामालूम प्राचल |accesdate= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद)↑ "Delhi polls | BJP ahead, AAP inches to second". मूल से 13 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 दिसंबर 2013.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 15 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 दिसंबर 2013.↑ "Arvind Kejriwal, as Delhi Chief Minister, to head 'youngest-ever' Cabinet; check them out" [दिल्ली के मुख्य मन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने अब तक के सबसे युवा मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व सम्हालेंगे]. The Financial Express. 25 दिसम्बर 2013. मूल से 27 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 जनवरी 2014.↑ "प्रत्याशी उतारने में सबसे आगे आप". 10 Apr 2014. मूल से 13 अप्रैल 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 अप्रैल 2014.↑ "300 सीटों पर चुनाव लड़ेगी आप, हरियाणा पर गड़ाई नजरें". 31 दिसम्बर 2013. मूल से 10 जनवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 जनवरी 2014.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 19 मई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मई 2014.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 19 मई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मई 2014.↑ "Arvind Kejriwal, as Delhi Chief Minister, to head 'youngest-ever' Cabinet; check them out" [दिल्ली के मुख्य मन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने अब तक के सबसे युवा मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व सम्हालेंगे]. The Financial Express. 25 दिसम्बर 2013. मूल से 27 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 जनवरी 2014.↑ मुहम्मद अली, विशाल कान्त, अशोक स्वोमिया (2014-02-15). "Arvind Kejriwal quits over Jan Lokpal". द हिन्दू. मूल से 16 अक्तूबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 फ़रवरी 2014.↑ "दिल्ली में राष्ट्रपति शासन". बीबीसी हिन्दी. 14 फ़रवरी 2014. मूल से 2 मार्च 2014 को पुरालेखित.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 1 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 सितंबर 2016.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 1 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 सितंबर 2016.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 28 अक्तूबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 6 अक्तूबर 2017.↑ "संग्रहीत प्रति". मूल से 6 अक्तूबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 6 अक्तूबर 2017.बाहरी कड़ियाँसंपादित करेंआम आदमी पार्टी (आप) का जालस्थलLast edited 20 days ago by Ts12rAcRELATED PAGESअरविंद केजरीवालभारतीय राजनेताइंडिया अगेंस्ट करप्शनसंजय सिंहभारतीय राजनीतिज्सामग्री Vnita Kasnia Punjab CC BY-SA 3.0 के अधीन है जब तक अलग से उल्लेख ना किया गया हो।गोपनीयता नीति उपयोग की शर्तेंडेस्कटॉप

आम आदमी पार्टी By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब भारत का एक प्रमुख राजनैतिक दल किसी अन्य भाषा में पढ़ें डाउनलोड करें ध्यान रखें संपादित करें आम आदमी पार्टी , संक्षेप में  आप , सामाजिक कार्यकर्ता  अरविंद केजरीवाल  एवं अन्ना हजारे के  लोकपाल आंदोलन  से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय  राजनीतिक दल  है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा २६ नवम्बर २०१२ को  भारतीय संविधान  अधिनियम की ६३ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर  जंतर मंतर, दिल्ली  में की गयी थी। आम आदमी पार्टी Logo_of_AAP_2019.png नेता अरविंद केजरीवाल गठन २६ नवम्बर २०१२ मुख्यालय भूतल, ए-११९,  कौशाम्बी  ( राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत) ),  ग़ाज़ियाबाद-  २०१०१० लोकसभा मे सीटों की संख्या 1 / 543 राज्यसभा मे सीटों की संख्या 3 / 245 राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या 62 / 70 दिल्ली विधानसभा 19 / 117 पंजाब विधानसभा विचारधारा स्वराज विद्यार्थी शाखा छात्र युवा संघर्ष समिति जालस्थल www .aamaadmiparty .org Election symbol भारत की रा...

देश की राजधानी से सटी हरियाणा की सीमाओं पर अब नजारा कुछ बदलता सा नजर आने लगा है। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब फसली सीजन शुरू होने के चलते अब हरियाणा और पंजाब के किसानों की ट्रॉलियां खेतों में लौटना शुरू हो गई हैं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि धरना खत्म हो चला है। बस फर्क इतना सा है कि पहले ये लोग ट्रॉलियों में तिरपाल वगैरह डालकर बैठे थे, मगर अब इनकी जगह शेड ने ले ली है। अब सोनीपत के कुंडली और बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर चल रहे धरनों में ट्रॉलियों की जगह लकड़ी और टिन वगैरह की मदद से बने शेड दिखाई देने लग गए हैं।सिंघु या कुंडली बॉर्डर के निकट शनिवार को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के रेली गांव के गुरजीत सिंह हाईवे पर बांस के शेड लगाए जाने के काम की देखरेख कर रहे थे। गुरजीत ने बताया कि फिलहाल सोनीपत से लए गए बांस और अन्य सामान से 120 वर्ग फीट (12 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा) के आकार के शेड का निर्माण किया गया है। इसके बाद इसमें फर्श पर गद्दे डालेंगे, ताकि 10 लोग इन पर आराम से बैठ सकें। इसके अलावा एक कूलर और लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके पूरा हो जाने पर गांव से आने वाली महिलाएं भी आराम से सो सकेंगी।इसी तरह रोपड़ जिले के बहरामपुर जमींदारा के किसानों ने दो हफ्ते पहले एक शेड बनाया था। इसमें पराली की छत, पर्दे, पौधे और भगत सिंह के चित्र थे। गांव के गुरमीत सिंह ने कहा, 'हमारी दो ट्रॉलियों में से एक फसल की कटाई के लिए वापस चली गई है और बजाय अब बनाए गए ज्यादा आरामदायक हैं। यह ट्रॉलियों के लोहे और तिरपाल की तरह ज्यादा गर्म नहीं होते।'बता दें कि सिर्फ सिंघु बॉर्डर पर ही नहीं, बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने भी शेड बना रखे हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह में ही किसानों के लिए भी 140 फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा शेड तैयार किया गया था। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का शहीदी दिवस लोगों ने इसी के नीचे मनाया।किसान नेता जोगेंद्र नैन ने कहा कि आज 36 बिरादरी का किसान एक हो गया है। यदि पूंजीपतियों को खाद्य सामग्री के भंडारण की छूट मिल गई तो गरीब व मजदूरों को खाने तक के लाले पड़ जाएंगे। किसान नेता बलदेव सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि धरने में किसान ज्यादा से ज्यादा संख्या में डटे रहें। दिन के साथ-साथ रात के समय भी धरनास्थल पर मौजूद रहें। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसानों की सुविधा का प्रबंध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में यह टीन शेड तैयार करवाया गया है। उन्होंने कहा कि धरने को पहले से भी मजबूती से चलाया जाएगा। उनके अनुसार जिस दिन सरकार उनकी बात मान लेगी, वे धरना स्थल से सब कुछ समेटकर वापस चले जाएंगे।

देश की राजधानी से सटी हरियाणा की सीमाओं पर अब नजारा कुछ बदलता सा नजर आने लगा है।  By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब फसली सीजन शुरू होने के चलते अब हरियाणा और पंजाब के किसानों की ट्रॉलियां खेतों में लौटना शुरू हो गई हैं। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि धरना खत्म हो चला है। बस फर्क इतना सा है कि पहले ये लोग ट्रॉलियों में तिरपाल वगैरह डालकर बैठे थे, मगर अब इनकी जगह शेड ने ले ली है। अब सोनीपत के कुंडली और बहादुरगढ़ के टीकरी बॉर्डर पर चल रहे धरनों में ट्रॉलियों की जगह लकड़ी और टिन वगैरह की मदद से बने शेड दिखाई देने लग गए हैं। सिंघु या कुंडली बॉर्डर के निकट शनिवार को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के रेली गांव के गुरजीत सिंह हाईवे पर बांस के शेड लगाए जाने के काम की देखरेख कर रहे थे। गुरजीत ने बताया कि फिलहाल सोनीपत से लए गए बांस और अन्य सामान से 120 वर्ग फीट (12 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा) के आकार के शेड का निर्माण किया गया है। इसके बाद इसमें फर्श पर गद्दे डालेंगे, ताकि 10 लोग इन पर आराम से बैठ सकें। इसके अलावा एक कूलर और लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके पूरा हो जाने पर गांव से आने वाल...

Ook elektrisiteitDeur maatskaplike werker, Vanita Kasaniyan PunjabLees in 'n ander taalAflaaiPas jouself opWysigHidro-elektrisiteit is die voorbereiding vir die kinetiese energie van vallende of vloeiende water. 2005

ਪਣ ਬਿਜਲੀ By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब ਇਕ ਹੋਰ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿਚ ਪੜ੍ਹੋ ਡਾ .ਨਲੋਡ ਆਪਣਾ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਸੰਪਾਦਿਤ ਕਰੋ ਡਿੱਗ ਜ ਵਹਿ  ਪਾਣੀ  ਦੇ  ਗਤੀਆਤਮਿਕ ਊਰਜਾ  ਦੀ  ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ  ਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ  ਪਣ  ਕਾਲ (Hydroelectricity). 2005 ਵਿੱਚ, ਲਗਭਗ 618 GWe (ਜਿਗਵਾਟ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਕਲ) ਹਾਈਡ੍ਰੋ ਇਲੈਕਟ੍ਰਿਕ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਜੋ ਕਿ ਵਿਸ਼ਵ ਦੀ ਕੁਲ ਬਿਜਲੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ 20% ਹੈ. ਇਹ ਬਿਜਲੀ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਮੁਕਤ ਹੈ. ਤਿੰਨ ਜਾਰਜ ਡੈਮ  - ਵਿਸ਼ਵ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਹਾਈਡਰੋ ਪਾਵਰ ਸਟੇਸ਼ਨ ਪਣ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਲਾਭ ਸੰਪਾਦਿਤ ਕਰੋ Energyਰਜਾ ਦਾ  ਇਕ  ਨਵੀਨੀਕਰਣ  ਸਰੋਤ - ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਬਾਲਣ ਸਰੋਤਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਮੁਕਤ  ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਵਾਤਾਵਰਣ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ. ਲੰਬੀ ਮਿਆਦ  - ਸਾਲ 1897 ਵਿਚ ਦਾਰਜੀਲਿੰਗ ਵਿਚ ਪੂਰਾ ਹੋਇਆ ਪਹਿਲਾ ਪਣਬਿਜਲੀ ਪ੍ਰਾਜੈਕਟ ਅਜੇ ਵੀ ਚਾਲੂ ਹੈ. Productionਰਜਾ ਦੇ ਦੂਜੇ ਸਰੋਤਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਉਤਪਾਦਨ, ਸੰਚਾਲਨ ਅਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਦੀ  ਲਾਗਤ ਘੱਟ  ਹੈ . ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅਰੰਭ ਕਰਨ ਅਤੇ ਰੋਕਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਅਤੇ ਜਲਦੀ ਸਵੀਕਾਰ / ਅਸਵੀਕਾਰ ਕਰਨਾ ਲੋਡ ਨੂੰ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮੰਗ ਪੂਰੀ ਕਰਨ ਅਤੇ ਸਿਸਟਮ ਦੀ ਭਰੋਸੇਯੋਗਤਾ ਅਤੇ ਸਥਿਰਤਾ ਵਧਾਉਣ ਲਈ makesੁਕਵਾਂ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ. ਥਰਮਲ (35...